दिल्ली के निजी स्कूलों में अपना भविष्य तय कर रहे मासूम बच्चे आने वाले वक्त में गंभीर बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। इन बच्चों को कम उम्र में ही मोटापा जैसी परेशानी देखने को मिल रही है।
सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने एक शोध के जरिए दावा किया है कि दिल्ली के निजी स्कूलों में पढ़ रहे 30 फीसदी बच्चे मोटापा ग्रस्त हैं। डॉक्टरों की मानें तो मधुमेह के नए मरीजों में 10 फीसदी मरीज 10 से 18 वर्ष आयुवर्ग के पाए गए हैं।
इससे हमारे मासूम बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। ये शोध वर्ष 2010 से अभी तक करीब 1078 बच्चों पर किया गया था। गुरुवार को अस्पताल में हुई एक कॉन्फ्रेंस में इंस्टीट्यूट ऑफ मिनिमल एक्सेस, मेटाबोलिक एंड बेरिएट्रिक सर्जरी के विशेषज्ञों ने इस शोध को प्रस्तुत किया।
डॉक्टरों ने बताया कि शोध में स्कूल संचालकों ने इस गलती को स्वीकार करते हुए सुधार पर काम करने का भरोसा दिया है। कार्यक्रम में मौजूद सांसद अनुराग ठाकुर, क्रिकेटर गौतम गंभीर, स्प्रिंगलेस स्कूल की प्राचार्या ए.एम.वट्टल और सरदार पटेल विद्यालय की प्राचार्या अनुराधा जोशी मौजूद रहीं।