दिल्ली विधानसभा के तीन दिवसीय मानसून सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही जारी है। विधानसभा में आम आदमी पार्टी (आप) और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक हुई। आम आदमी पार्टी के विधायकों ने विधानसभा में चावल के कथित घोटाले का मुद्दा उठाया और उस पर चर्चा की मांग की। वहीं, दिल्ली विधानसभा स्पीकर ने आम आदमी पार्टी के आठ विधायकों को मार्शल आउट किया।
आप विधायक संजीव झा ने चावल घोटाले पर विरोध में प्रदर्शन करने पर कहा, "ये बहुत बड़ा घोटाला है। और आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। 22 हजार करोड़ के घोटाला का प्लान भारतीय जनता पार्टी का था। 22 हजार करोड़ का समझिए, ये मैं नहीं कह रहा, ये सेंट्रल गवर्नमेंट कह रही है। और जब पकड़े गए, तो कार्रवाई किस पर हुई है? तो इसका मतलब ये है कि इतना बड़ा घोटाला...पूरे डॉक्यूमेंट है इसके कि किस तरह से इन सब की इन्वॉल्वमेंट थी। तो मैं ये पूछना चाहूंगा कि आखिर खाद्य मंत्री पर ये कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।"
आप विधायक विशेष रवि ने चावल घोटाले पर कहा, 'भारतीय जनता पार्टी के घोटालों की शृंखला में एक और घोटाला सामने आया है। जिसके अंदर असम कॉर्पोरेशन की तरफ से दिल्ली गवर्नमेंट के पास चावल आया था गरीबों को बांटने के लिए। लेकिन जानकारी ये मिली है कि इस चावल को, जो गरीबों में बांटना था, इस चावल को भाजपा की सरकार ने, सिरसा जी, जो खाद्य आपूर्ति मंत्री हैं, इन्होंने इस चावल को मार्केट में जो प्राइवेट वेंडर्स हैं, उनको बेच दिया।'
मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ये आरोप बेबुनियाद हैं। मंत्री ने एक आप विधायक (कुलदीप कुमार) पर सदन के सदस्यों और अधिकारियों पर चावल फेंकने का आरोप भी लगाया और इसे सदन की अवमानना बताया।
इससे पहले मानसून सत्र के दूसरे दिन विधानसभा में सोमवार को राजधानी की बदहाल सफाई व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठा। भाजपा के कई विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित सफाई नहीं होने और कूड़ा उठान व्यवस्था चरमराने की शिकायत की। विधायकों ने कहा कि कई इलाकों में समय पर कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है और सड़कों व गलियों की सफाई भी नियमित नहीं हो रही है।
वहीं, विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सोमवार को साइकिल खरीद को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक हुई। आप विधायक साइकिल चलाकर विधानसभा पहुंचे और सरकार पर सरकारी स्कूलों की छात्राओं के लिए साइकिलें ऊंची दर पर खरीदने का आरोप लगाया। विधायकों ने आपत्तिजनक नारे भी लगाए। छह विधायकों को मार्शल ने बाहर किया।
आप विधायकों का दावा है कि उनकी सरकार ने करीब 4,200 रुपये प्रति साइकिल की दर से खरीद की थी, जबकि मौजूदा दिल्ली सरकार ने टेंडर के जरिए 1.30 लाख साइकिलें 6,957 रुपये प्रति साइकिल की दर से खरीदीं। उनका कहना है कि समान साइकिलों की कीमत में करीब 2,700 रुपये का अंतर है। ये साइकिलें सरकारी स्कूलों की छात्राओं को विद्या वाहिनी योजना के तहत दी गई थीं।