सर्दी अब जानलेवा हालात में पहुंच गई है। उच्च रक्तचाप और ह्रदय रोगियों को बेहद सावधानी बरतनी होगी।
निजी चिकित्सक डा. कौशल बताते हैं कि सर्दी में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्तचाप बढ़ता है। गर्मी में पसीना निकलने से शरीर का सॉल्ट बाहर निकल जाता है।
सर्दी में ऐसा नहीं होता, जिस कारण शरीर में सॉल्ट इकट्ठा हो जाता है। दोनों स्थितियां मिलकर हृदय की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं। इसके परिणामस्वरूप हृदय से संबंधित कई जटिलताएं पैदा हो जाती हैं।
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सर्दी में लोग अधिक ऊर्जा के लिए अधिक खाना खाते हैं। अधिक कैलौरीयुक्त खाद्य पदार्थों के लेने के परिणामस्वरूप कोलस्ट्रॉल और ब्लडप्रेशर बढ़ता है। यह स्थिति भी दिल की सेहत के लिए नुकसानदेह है।
सर्दी में हवा में व्याप्त प्रदूषित कण ऊपर की ओर नहीं फैल पाते। हवा में प्रदूषित तत्वों का घनत्व बढ़ जाता है। प्रदूषण बढ़ने के कारण सर्दी में सांस संबंधी रोग भी बढ़ जाते हैं।
सरसों और सब्जियों की फसल पर खतरा
कड़ाके की सर्दी के चलते सरसों की फसल और खेत में सब्जियां खराब हो रही हैं। किसानों को भय है कि सर्दी का कहर यूं ही जारी रहा तो रबी की फसल की औसतन उपज में भारी गिरावट आ सकती है। खासकर अगेती सरसों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
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मेवात जनपद में सिंचाई के पर्याप्त साधन न होने से यहां के अधिकतर किसान रबी की फसलों में तिलहन की सर्वाधिक बिजाई करते हैं। इसमें सरसों को ही अधिक वरीयता देते हैं। इस बार अनुकूल मौसम व भूमि में पर्याप्त नमी होने से किसानों ने सरसों की काफी मात्रा में बिजाई की थी।
सरसों की बंपर पैदावार की खासी उम्मीद जगी थी, लेकिन पिछले कई रोज से पड़ रही कड़ाके की सर्दी से सरसों की फसल बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।