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सरकारी पैसे से कानूनी मदद लेने स्वराज इंडिया ने अरविंद केजरीवाल से पूछे ये चार बड़े सवाल

Tue, 04 Apr 2017 11:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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yogendra yadav, cm kejriwal - फोटो : अमर उजाला
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स्वराज इंडिया ने सरकारी पैसे से अदालती लड़ाई लड़ने के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि अगर काम सरकारी है तो बाजार दर से 50-60 गुना महंगे रेट पर केजरीवाल ने कानूनी सहायता क्यों ली।
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यह आम लोगों की गाढ़ी कमाई के बेजा इस्तेमाल का एक और उदाहरण पेश किया है। पार्टी ने इस बारे में केजरीवाल से सवाल भी किए हैं। पार्टी प्रवक्ता अनुपम का कहना है कि दिल्ली सरकार की दलील एक बारगी अगर मान ली जाए कि काम सरकारी था तो इतनी महंगी कानूनी सहायता क्यों ली गई।

दिल्ली उच्च न्यायालय में तीस से चालीस हजार रुपये प्रतिपेशी पर अच्छे से अच्छे वकील अदालत में खड़े होते हैं। ऐसे में केजरीवाल की क्या मजबूरी थी कि बाजार दर से पचास-साठ गुना अधिक खर्च करके राम जेठमलानी को पेश किया गया?
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​स्वराज इंडिया के सवाल

योगेंद्र यादव - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि मानहानि का मुकदमा अभी शुरुआती दौर में है। उनका आरोप है कि इसी स्तर पर मामले का न सिर्फ उपराज्यपाल से छिपाने की कोशिश हुई, बल्कि अधिकारियों पर दबाव डालकर वकील राम जेठमलानी को फीस देने की कोशिश की गई।

दिल्ली सरकार का यह आचरण गैरकानूनी व अनैतिक है। अनुपम का कहना है कि मामला प्रकाश में आने पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया हास्यास्पद और बेबुनियाद दलील दे रहे हैं। इससे पहले भी सरकारी धन का इस्तेमाल निजी प्रचार में किया गया है। दिल्ली की जनता एमसीडी चुनाव में इसका सबक सिखाएगी।  

स्वराज इंडिया के सवाल
-अगर यह सरकारी काम था तो उपराज्यपाल से क्यों छिपाया और अधिकारियों पर दबाव क्यों डाला गया? 
-हर सरकारी काम का एक प्री-अप्रूव्ड रेट होता है। इस काम का कोई प्री-अप्रूव्ड रेट था क्या? 
-बाजार दर से पचास-साठ गुना अधिक खर्च करके राम जेठमलानी को क्यों पेश किया गया?
-बीस करोड़ रुपये के सालाना बजट वाली दिल्ली लीगल सर्विसेज अथॉरिटी से कानूनी सहायता क्यों नहीं ली गई?
 
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