स्वराज इंडिया ने सरकारी पैसे से अदालती लड़ाई लड़ने के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि अगर काम सरकारी है तो बाजार दर से 50-60 गुना महंगे रेट पर केजरीवाल ने कानूनी सहायता क्यों ली।
यह आम लोगों की गाढ़ी कमाई के बेजा इस्तेमाल का एक और उदाहरण पेश किया है। पार्टी ने इस बारे में केजरीवाल से सवाल भी किए हैं। पार्टी प्रवक्ता अनुपम का कहना है कि दिल्ली सरकार की दलील एक बारगी अगर मान ली जाए कि काम सरकारी था तो इतनी महंगी कानूनी सहायता क्यों ली गई।
दिल्ली उच्च न्यायालय में तीस से चालीस हजार रुपये प्रतिपेशी पर अच्छे से अच्छे वकील अदालत में खड़े होते हैं। ऐसे में केजरीवाल की क्या मजबूरी थी कि बाजार दर से पचास-साठ गुना अधिक खर्च करके राम जेठमलानी को पेश किया गया?