खुफिया विभाग ने 25 कुख्यात बदमाशों चिह्नित कर उनकी रिपोर्ट शासन को भेजी है। रिपोर्ट में बदमाशों की हिस्ट्री और उन पर लगाए गए आरोपों को आधार बनाते हुए कहा गया है कि इन्होंने जिले की शांति व्यवस्था को खत्म कर दिया है। इन पर कठोर कार्रवाई करते हुए जिले की जेल में न रखते हुए एनसीआर से बाहर की जेलों में शिफ्ट कराने की मांग की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर गौतमबुद्ध नगर को अपराध मुक्त करना है तो इन बदमाशों पर कार्रवाई होनी बेहद जरूरी है।
गौतमबुद्ध नगर में पिछले एक दशक से बेखौफ बदमाशों के सामने आम आदमी तो दूर पुलिस भी बोना साबित हो गई है। बदमाश अपराध को अंजाम दे जाते हैं और पुलिस उनको गिरफ्तार नहीं कर पाती है। दनकौर में मनमोहन चौधरी और दादरी में विजय पंडित हत्याकांड समेत करीब 10 से 15 ऐसे मामले हैं जिनमें बदमाशों ने संगठित हो अपराधों को अंजाम दिया है। खुफिया विभाग ने इस संबंध में एक सूचना शासन को दी है।
एलआईयू के अधिकारियों की मानें तो जो बदमाश स्थानीय जेल में बंद हैं उन्हें एनसीआर से बाहर की जेल में बंद कराने के लिए भी लिखा गया है। इससे वे अपने गुर्गों से आसानी से बात नहीं कर पाएंगे और बदमाश अपने आका से मिलने से भी गुरेज करेंगे। खुफिया विभाग ने अनिल दुजाना का उदाहरण पेश करते हुए कहा गया है कि जब से दुजाना बांदा जेल में बंद है तब से उसके गुर्गे भी शांत हैं।
हर किसी से मांगते हैं रंगदारी
गौतमबुद्धनगर में इन दिनों बदमाशों पर एक ही हथियार है वह है रंगदारी का जिसे वह किसी से भी मांग बैठते हैं। बदमाशों के निशाने पर व्यापारियों के अलावा ऐसे लोग भी है जो अपने परिवार के साथ ठीक-ठाक काम धंधे कर रहे हैं। बदमाशों की हिट लिस्ट में ऐसे भी कुछ लोग हैं जो अचानक धनवान हो गए हैं।
ट्रांसपोर्टर भी हैं निशाने पर
बदमाशों के निशाने पर ट्रांसपोर्टर भी है। अगर ट्रांसपोर्टर रंगदारी देने में आना करते हैं तो उन्हें पहले तो धमकी दी जाती है और जब नहीं मानते हैं तो विनय जोशी की हत्या कर मौत के घाट उतार दिया था।