उबर कैब रेप के दोषी को सजा दिलाने में पुलिस की जांच के साथ मेडिकल व फोरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका बेहद अहम रही। पीड़िता की डॉक्टरी जांच, कैब से मिले फोरेंसिक साक्ष्यों व मोबाइल कॉल डिटेल के अलावा टैक्सी की जीपीएस लोकेशन व गूगल मैप का रिकार्ड भी कोर्ट में पेश किया गया।
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट पेश की। पीड़िता की दो बार बाड़ा हिंदू राव अस्पताल में एमएलसी करवाई गई थी। इन रिपोर्ट में पीड़िता से मारपीट, उसके गले आदि पर खरोंचों की पुष्टि हुई थी।
इससे उसका गला दबाने की दलील पुलिस ने दी थी। इन रिपोर्ट में पीड़िता से दुष्कर्म होने की पुष्टि हुई थी। मेडिकल साक्ष्यों के फोरेंसिक साक्ष्यों का भी शिव कुमार यादव को सजा दिलाने में अहम भूमिका रही।
ये हैं वो कारण जिनसे केस हुआ मजबूत
इन साक्ष्यों में कैब से मिले, फिंगर प्रिंट, बाल, कई तरह के तरल पदार्थ, पीड़िता व दोषी के खून के नमूने समेत कई साक्ष्य शामिल थे। सीबीआई के लैब में हुई फोरेंसिक जांच में पीड़िता व आरोपी के नमूनों से लिए गए डीएनए सैंपलों का मिलान हुआ था।
अभियोजन ने अपहरण के आरोपों को साबित करने के लिए कैब के रूट का जीपीएस चार्ट कोर्ट में पेश किया। इस चार्ट से यह पता चला कि कैब किस रूट से वसंत विहार से इंद्रलोक आई और यह यात्रा कब शुरू हुई और कब पूरी हुई।
उबर के अधिकारी ने कैब के रूट को गूगल मैप के जरिये समझाया कि किस तरह शिव कुमार यादव ने तय रूट छोड़ दूसरा रास्ता लिया और पीड़िता को उसके घर से आगे ले गया।
दो महिला एसआई ने की थी मामले की जांच
इन साक्ष्यों के अलावा केस की जांच दो महिला एसआई ने की थी। प्रथम जांच अधिकारी अलमा मिंज ने केस की शुरुआती कार्रवाई की।
द्वितीय जांच अधिकारी एसआई रेनु सिंह ने शिव कुमार यादव से पूछताछ, पीड़िता का बयान दर्ज करवाने, फोरेंसिंक साक्ष्य जुटाने और आरोपी की निशानदेही पर साक्ष्यों की बरामदगी की थी।
पुलिस की एक टीम ने मथुरा से पहले शिव कुमार की कैब बरामद की व उसके बाद उसे गिरफ्तार कर दिल्ली की कोर्ट में पेश किया था।