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थर्मल पावर प्लांट के प्रदूषण से एक वर्ष में हुईं 76 हजार समयपूर्व मौतें

Sat, 08 Dec 2018 10:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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देश में कोयला आधारित विद्युत संयंत्र अभी तक उत्सर्जन मानक का पालन नहीं कर पाए हैं। अब उत्सर्जन मानक का पालन करने के लिए नई डेडलाइन 31 दिसंबर तय हुई है। इससे पहले बीते वर्ष दिसंबर तक विद्युत संयंत्रों को उत्सर्जन मानकों का पालन करना था। इस देरी की वजह से अब तक एक वर्ष के भीतर कुल 76 हजार समयपूर्व मौतें हो चुकी हैं।

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ग्रीनपीस इंडिया की ओर से शुक्रवार को यह आंकड़ा जारी किया गया। पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था ग्रीनपीस ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (सीपीसीबी) से हासिल किए गए एक जवाब के बाद यह विश्लेषण किया है।

सल्फर डाई आक्साइड कम कर बच सकते थे 34 हजार लोग
विश्लेषण में सामने आया कि अगर मानकों को समय से लागू किया जाता तो सल्फर डाई ऑक्साइड में 48%, नाइट्रोडन डाई ऑक्साइड में 48% और पीएम के उत्सर्जन में 40% तक की कमी की जा सकती थी। वहीं, कुल 76 हजार समयपूर्व मौतों में सिर्फ सल्फर डाई ऑक्साइड कम करके 34 हजार, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड कम करके 28 हजार और पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) को कम करके 14 हजार मौत से बचा जा सकता था।
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3.8 लाख मौतों से बचा जा सकता है
इन मानकों को लागू करने की समय सीमा 7 दिसंबर  2017 रखी गई थी। एक साल बीतने पर भी पावर प्लांट के उत्सर्जन में बेहद कम नियंत्रण पाया जा सका है। इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि उर्जा मंत्रालय के कोयला आधारित पावर प्लांटों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने का कोई इरादा नहीं दिखता, इतना ही नहीं कोर्ट ने 2022 तक इन मानकों को लागू करने का आदेश भी दिया था। ग्रीनपीस के विश्लेषण के अनुसार, अगर इन मानकों के अनुपालन में पांच साल की देरी की जाती है तो उससे 3.8 लाख मौत हो सकती हैं। सिर्फ नाइट्रोजन डाई आक्साइड के उत्सर्जन में कमी से 1.4 लाख मौतों से बचा जा सकता है। इस अनुमान में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के नए उपक्रम शामिल नहीं किए गए हैं।

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एक दशक से लटका है उत्सर्जन मानक का पालन 

ग्रीनपीस इंडिया के कैंपेनर सुनील दहिया ने बताया कि थर्मल पावर प्लांट के लिए उत्सर्जन मानकों को लागू करना पिछले कुछ दशक से लटका हुआ है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उर्जा मंत्रालय और कोयला पावर कंपनी इन मानकों को लागू करने से बच रही है और गलत तकनीकी आधार का सहारा ले रही है।

उन्हें समझना चाहिए कि भारत में वायु प्रदूषण की वजह से लोगों का स्वास्थ्य संकट में है और थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाला उत्सर्जन इसकी बड़ी वजहों में से एक है। भारत को तत्काल उत्सर्जन मानकों को पूरा करने और नए कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को रोककर अक्षय ऊर्जा की तरफ बढ़ने की जरूरत है।

थर्मल पावर प्लांट तत्काल पूरें करें उत्सर्जन मानक
ग्रीनपीस इंडिया ने मांग की है कि पर्यावरण मंत्रालय जल्द से जल्द थर्मल पॉवर प्लांट को प्रदूषण के लिए उत्तरदायी बनाए। वहीं, सारे थर्मल पॉवर प्लांट को तत्काल उत्सर्जन मानकों को हासिल करना चाहिए और अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नए थर्मल पॉवर प्लांट बनाने से रोकना चाहिए। इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इससे जुड़े कदम को सार्वजनिक मंच पर लोगों के लिए उपलब्ध भी करवाना चाहिए।
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