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Delhi NCR News: सड़क-रेल परियोजनाओं के लिए मिट्टी कितनी खोदी जा रही है, इस पर रहेगी नजर

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साधारण मिट्टी के उत्खनन और इस्तेमाल से जुड़े नियमों को एनजीटी में चुनौती, मंत्रालय के रुख का पालन करने का निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। सड़क और रेल जैसी परियोजनाओं के लिए मिट्टी की जरूरत पड़ती है, लेकिन इस मिट्टी की खुदाई और इस्तेमाल किन नियमों के तहत हो, इसे लेकर मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) पहुंच गया है। अधिकरण ने मामले में अंतरिम निर्देश देते हुए संबंधित पक्षों को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के जवाबी हलफनामे में बताए गए रुख का पालन करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई एक फरवरी 2027 को होगी।


अधिसूचना की वैधता को दी चुनौती
यह मामला मूल आवेदन संख्या 338/2026, नोबल एम. पैकाडा बनाम भारत संघ और अन्य से जुड़ा है। आवेदक ने 17 मार्च 2025 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी है। इसके जरिये पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 के परिशिष्ट-9 की प्रविष्टि 6 में बदलाव किया गया था। साथ ही, नए जोड़े गए परिशिष्ट-14 की वैधता पर भी सवाल उठाया गया है।
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मिट्टी की मात्रा तय करने के लिए जिला स्तर पर समिति
मंत्रालय ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा कि सड़क और रेल जैसी रैखिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए साधारण मिट्टी की खुदाई, उसे स्रोत से प्राप्त करने या उधार लेकर इस्तेमाल करने की व्यवस्था तय की गई है। इसके तहत मिट्टी की मात्रा की सीमा और पर्यावरण सुरक्षा के उपाय निर्धारित हैं। मंत्रालय के अनुसार, अनुमत मात्रा तय करने और उसकी निगरानी के लिए जिला स्तर पर समिति का प्रावधान भी है। वहीं, खनन पट्टे से जुड़े मामलों में संबंधित सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया का पालन करना होगा।
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अभी अंतिम फैसला नहीं
प्रधान पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने सुनवाई के दौरान मंत्रालय के जवाबी हलफनामे के पैराग्राफ 35 और 37 में दर्ज रुख का अंतरिम अवधि में पालन करने का निर्देश दिया। आवेदक के वकील ने भी इसी रुख का पालन सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था, जिस पर मंत्रालय के वकील ने आपत्ति नहीं जताई। मामले में अधिसूचना की वैधता पर अंतिम फैसला अभी नहीं आया है। अगली सुनवाई 1 फरवरी 2027 को होगी।
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