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दिल्ली दंगल में हर घंटे होती रहीं 42 चुनावी जनसभाएं

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दिल्ली के दंगल में चुनाव प्रचार के लिए कम समय होने पर राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी। बृहस्पतिवार को दिल्ली में चुनाव प्रचार समाप्त हो गया है। मगर इसके साथ ही जो आंकड़े सामने आए उससे साफ पता चलता है कि राजनीतिक दलों व उनके नेताओं ने प्रचार में कोई कमी नहीं छोड़ी है।
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आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में पूरे चुनाव प्रचार के दौरान हर घंटे 42 चुनावी रैलियों, जनसभाओं व पदयात्रा का आयोजन किया गया। इसमें मोदी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और केजरीवाल की सभाएं भी शामिल है।

दिल्ली में 12 जनवरी को चुनाव की घोषणा हुई। 14 जनवरी को अधिसूचना जारी होने के साथ नामांकन शुरू हो गया। नामांकन के पहले दिन यानि 14 जनवरी से 5 फरवरी तक प्रचार के लिए राजनीतिक दलों को कुल 23 दिन मिले।
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हर घंटे हुईं 42 चुनावी रैलियां

इन 23 दिनों में राजनीतिक दलों की ओर से दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को रैलियों, जनसभाओं व पदयात्राओं के लिए कुल 23 हजार 577 आवेदन मिले। इस तरह दिल्ली में हर घंटे 42 रैलियों का आयोजन किया गया।

दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी चंद्रभूषण कुमार के मुताबिक कुल आए आवेदनों में से 1875 जनसभाओं व रैलियों के आयोजन को रद्द कर दिया गया। बताते चले कि उसमें बृहस्पतिवार को ओखला में होने वाली राहुल का रोड शो भी शामिल है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में हुई ताबड़तोड़ रैलियों के दौरान आचार संहिता उल्लघन के कुल 252 मामले सामने आए है। जिसमें से 171 के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यही नहीं आम लोगों की ओर से 4 हजार से ज्यादा शिकायतें भी मिली, जिसपर उचित कार्रवाई की गई।
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200 करोड़ में हुआ दिल्ली में चुनाव प्रचार

पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च का बजट 30 से 40 फीसदी बढ़ गया है। एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली विधानसभा चुनाव में दलों और उम्मीदवारों की ओर से करीब दो सौ करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इससे प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया को भी जबरदस्त मुनाफा हुआ है।

एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली विधानसभा चुनाव में करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं जिसमें 60 फीसदी राजनीतिक दलों और 40 फीसदी उम्मीदवारों की ओर से खर्च किया जा रहा है।

चुनाव में सबसे अधिक खर्च रैली और उसके बाद प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिये जा रहे विज्ञापनों पर हो रहा है। एसोचैम का कहना है कि वर्ष-2013 में दिल्ली विधानसभा, वर्ष-2014 में लोकसभा और अब दिल्ली विधानसभा चुनाव की वजह से न सिर्फ मीडिया का रेवेन्यू बढ़ा है, बल्कि समाचार पत्रों का सर्कुलेशन और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की टीआरपी भी काफी बढ़ी है।

एसोचैम के महानिदेशक डी.एस. रावत ने बताया कि न सिर्फ टेलीविजन चैनल और समाचार पत्रों का व्यापार बढ़ा, बल्कि  होर्डिंग्स, प्रिंटर, सोशल मीडिया, विज्ञापन एजेंसी, शोधकर्ताओं, ग्राफिक डिजाइनर आदि का व्यापार काफी बढ़ा है। लोकसभा और दिल्ली विधानसभा चुनाव की वजह से एयरलाइंस के व्यापार को भी लाभ मिला। चुनाव में तकनीक का बहुत सहारा लिया जा रहा है इसकी वजह से गूगल, सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर, फेसबुक जैसी साइट्स की वजह से सोशल मीडिया को लाभ हुआ है।
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