फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या आप जानते हैं... चार रुपये के मेट्रो टोकन में होती थी 95 रुपये की चिप

Wed, 25 Dec 2019 05:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
विज्ञापन
metro-token
विज्ञापन

17 साल पहले दिल्ली मेट्रो का परिचालन शुरू होने पर इसमें सफर करने के लिए टोकन की सुविधा दी गई। यात्रियों की सुविधा के लिए सिंगल जर्नी टोकन की शुरुआत की गई। मेट्रो के सामने यह बड़ी चुनौती थी कि इस टोकन में 95 रुपये का चिप लगा हुआ होता था जबकि टोकन की कीमत महज चार रुपये होती थी। 

विज्ञापन


यात्रियों के टोकन ले जाने पर मेट्रो का काफी नुकसान होने की आशंका भी थी, इसके बावजूद मेट्रो के आगे बढ़ने की गति बनी रही। हालांकि बाद में इसका वैकल्पिक इंतजाम कर लिया गया। मेट्रो के परिचालन के 17 वर्ष पूरे होने पर मेट्रो भवन में आयोजित कार्यक्रम के मौके पर प्रबंध निदेशक डॉ. मंगू सिंह ने मेट्रो के साथ अपने अनुभवों को साझा करते हुए ये बातें कहीं। 

प्रबंध निदेशक ने जापान की यात्रा की यादें साझा करते हुए कहा कि पहली बार वहां जाने पर देखा कि एक्जिट गेट की ऊंचाई काफी कम थी। कोई भी इसे लांघकर बाहर जा सकता था। जिज्ञासावश उन्होंने एक कर्मी से पूछा कि कोई इसे पार कर बाहर तो निकलते तो उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि कोई ऐसा क्यों करेगा। 
विज्ञापन


इस मौके पर पिछले 17 वर्षों के दौरान मेट्रो की उपलब्धियों और नेटवर्क विस्तार के बारे में भी जानकारी एक प्रस्तुति के जरिये दी गईं। कार्यक्रम में 10 बेहतरीन पेंटिंग को प्रदर्शित किया गया जबकि पपेट शो, बांसुरी वादन के जरिये कलाकारों ने दर्शकों का मनोरंजन किया।

मेट्रो में अपनी आवाज का जादू बिखरने वाले टीवी एंकर रिनी साइमन खन्ना और शम्मी नारंग सहित डीएमआरसी के कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल, मोहिंदर यादव, निखिल गिरी सहित डीएमआरसी के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

विज्ञापन

दीवार हटाने से दफ्तर में बची क्यूबिकल: डॉ. सिंह  

मंगू सिंह - फोटो : अमर उजाला
डीएमआरसी के एमडी डॉ. मंगू सिंह ने 22 साल के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि शुरुआती दौर में मेट्रो का दफ्तर काफी छोटा हुआ करता था। इस वजह से उनके साथ एक और अधिकारी को 6 गुना 8 साइज के दो क्यूबिकल मिले हुए थे।

उस वक्त श्रीधरन एमडी थे जबकि दो नए डायरेक्टर को भी पदभार ग्रहण करना था। इसी दौरान डॉ. सिंह और उनके सहयोगी को इस बात की चिंता सताने लगी कि कहीं क्यूबिकल, नए अधिकारियों को न दे दी जाए। इस हालात से बचने के लिए दोनों ने क्यूबिकल के बीच की दीवारें हटा दीं जिससे ओपन स्पेस में उनकी सीटें भी आ गईं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें