केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली की जनता बहुत नाराज है। इस बार सात में से एक भी लोकसभा सीट नहीं देगी। केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को खत्म कर दिया। यह देश के लोकतंत्र, सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली की दो करोड़ जनता के साथ मजाक है। यह अध्यादेश कोर्ट में पांच मिनट भी नहीं टिकेगा, इसीलिए शुक्रवार को जैसे ही सुप्रीम कोर्ट छुट्टियों के लिए बंद हुआ, वैसे ही केंद्र ने अध्यादेश लाकर फैसले को पलट दिया। ये पहले दिन से ही अध्यादेश लाने की तैयारी में थे। इस वजह से पहले तीन दिन सेवा सचिव और फिर मुख्य सचिव गायब हो गए। तीन दिन बाद सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक हुई तो दो दिन उपराज्यपाल प्रस्ताव लेकर बैठ गए। भाजपा ने दिल्ली की जनता को तमाचा मारा है। उसने बता दिया है कि जनता चाहे जिसे चुन ले, भाजपा वाले उसे काम नहीं करने देंगे। आप इसके खिलाफ दिल्ली में महारैली करेगी। राज्यसभा में इसे पास होने से रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने विपक्ष से समर्थन भी मांगने की बात कही।
...तो वापस लिया जाएगा अध्यादेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है। जब इन्होंने अध्यादेश लाकर पूरे फैसले को खत्म कर दिया तो इसका क्या मतलब रह गया। जब कोई फैसला ही नहीं बचा है तो उसकी समीक्षा कैसे हो सकती है। इसका मतलब तभी रहेगा, जब उसकी सुनवाई से पहले अध्यादेश को वापस लिया जाएगा। अध्यादेश से साबित हो गया है कि लड़ाई अब केंद्र बनाम सुप्रीम कोर्ट बन गई है। एक जुलाई को जब सुप्रीम कोर्ट खुलेगा तो दिल्ली सरकार अदालत में अध्यादेश को चुनौती देगी।
काम करने से रोक रही केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी को दो बार विधानसभा और एक बार एमसीडी के अंदर प्रचंड बहुमत मिला, लेकिन केंद्र सरकार दिल्ली सरकार को काम करने से रोक रही है। हमारे शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्री को जेल में डाल दिया, ताकि स्कूल और अस्पताल न बन सकें।