नर्सरी दाखिले के लिए स्कूलों में सीट कम है और आवेदन कई गुना अधिक हैं। प्रत्येक सीट के लिए करीब सात से लेकर 10 छात्रों के बीच रेस चल रही है। ऐसे में अभिभावकों को चिंता सता रही है कि उनके बच्चे का दाखिला होगा या नहीं। वह ज्यादा से ज्यादा स्कूलों में फॉर्म भर रहे हैं और एक स्कूल से दूसरे स्कूल में दौड़ लगा रहे हैं।
रोहिणी में माउंट आबू पब्लिक स्कूल में नर्सरी के लिए कुल 160 सीटें हैं। इनमें से करीब 1200 छात्रों के आवेदन आ चुके हैं। स्कूल की प्रधानाचार्या ज्योति अरोड़ा ने कहा कि शुक्रवार तक इनकी संख्या और भी ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है। हमने दाखिला के लिए आठ किमी तक की दूरी पर 85 अंक निर्धारित किए हैं। इसी हिसाब से छात्रों का चयन किया जाएगा। मयूर विहार फेज- 3 स्थित विद्या बाल भवन सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ सतवीर शर्मा ने कहा कि स्कूल में कुल 90 सीटों के लिए 500 से अधिक आवेदन आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन आवेदन ज्यादा आ रहे हैं और इसकी संख्या काफी तेजी से बढ़ रही हैं। पीतमपुरा स्थित एमएम पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य रूमा पाठक ने कहा कि 108 सीटों के लिए 600 से लेकर 700 के बीच आवेदन आ चुके हैं।
दूरी के आधार पर होगा चयन
स्कूल प्रशासन का कहना है कि छात्रों का चयन जारी किए मानदंड के आधार पर होगा। जिस छात्र के अंक अधिक होंगे उसी का दाखिला हो पाएगा। इसके लिए ज्यादातर स्कूलों ने दूरी के सबसे अधिक अंक तय किए हैं यानी जितना नजदीक स्कूल होगा उतनी ही दाखिले की संभावना होगी। इसे ध्यान में रखते हुए अभिभावक भी घर से नजदीक स्कूलों में दाखिले के लिए आवेदन कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि घर से स्कूल की दूरी गूगल मैप से मापी जाएगी। इसी आधार पर दाखिला होगा।
बोले अभिभावक
एक स्कूल में फॉर्म जमा कराने आईं कोमल मिश्रा ने कहा कि मुझे तो नींद भी नहीं आती है। दिन-रात बच्ची के दाखिले की चिंता सताती है। बस एक बार दाखिला हो जाए तो मैं चैन की सांस ले सकूंगी। शीतल नेगी ने कहा कि नर्सरी दाखिले के लिए इतने छात्रों में होड़ है कि डर लगता है कि मेरी बच्ची का दाखिला होगा या नहीं। वैसे तो मैंने ज्यादातर स्कूलों में आवेदन किया हुआ है। फिर भी यह डर खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा हैं।