फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सास से बदले की आग में युवक ने मचाई तबाही

विज्ञापन
विज्ञापन
पालम इलाके के साध नगर में एक व्यक्ति ने अपनी सास से बदला लेने के लिए एक इमारत की पार्किंग में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। आग वाहनों में लगकर भयावह रूप ले गई।
विज्ञापन


हादसे में आरोपी की सास और ऊपर के फ्लैट में रह रहे पता-पुत्र की मौत हो गई। वहीं आठ लोग घायल हो गए। जिनका राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

आग लगने के बाद कई लोगों ने ऊपरी मंजिल से नीचे छलांग लगा दी थी, जिसकी वजह से भी जख्मी हुए। पुलिस ने जांच के दौरान कालोनी में लगे एक सीसीटीवी फुटेज को खंगाला।
विज्ञापन

कई सालों से पति पत्नी अलग रह रहे थे

सीसीटीवी फुटेज में आरोपी को संदिग्ध हालत में घूमते देखा गया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की तो आरोपी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसकी पहचान अनिल के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार अनिल की 21 साल पहले कैलाशो देवी की बेटी ममता से शादी हुई थी। अनबन होने की वजह से पति-पत्नी सात सालों से अलग रह रहे थे।

ममता अपनी मां कैलाशो देवी और दो बेटी गीता और सिमरन के साथ इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने एक कमरे में रहती थी। वहीं, अनिल इसी गली में दूसरे मकान में रहता था।

इस तरह चली गई हादसे में तीन की जान

अनिल ने पूछताछ में बताया कि उसे शक था कि उसके पारिवारिक विवाद की वजह उसकी सास कैलाशो है। इसलिए वह सास से बदला लेना चाहता था। उसने रात में पेट्रोल से भरा एक बोतल लेकर इस मकान के पास पहुंचा और पार्किंग के पास पेट्रोल डालकर आग लगाकर भाग गया।

आरोपी ने बताया कि उसका मकसद सास को सबक सिखाना था न कि उसकी हत्या करना। हादसे में कमरे से बाहर नहीं निकल पाने पर उसकी सास कैलाशो देवी की झुलसने से मौत हो गई।

वहीं मरने वाले अन्य दो की शिनाख्त दूसरी मंजिल पर रहने वाले जगदीप उर्फ जगदीश (32) उसका डेढ़ साल का बेटा अक्षय के रूप में हुई। जगदीप मूलत: यमुना नगर के कालानोट गांव का रहने वाला था। पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है।

आग लगने से मच गया था कोहराम

हादसे में जगदीप की पत्नी इंदू 80 फीसदी झुलस गई है। अन्य घायलों की पहचान ममता(35), शीतला देवी (55), सविता(34), गीता (19), रीतेश अग्रवाल (35) और विष्णु अग्रवाल (44) रूप में हुई है।

यह इमारत वीरेंद्र अहलावत की है। वीरेंद्र स्थानीय पार्षद कुलदीप सोलंकी के जीजा हैं। तीन मंजिला यह इमारत दो हिस्सों में बंटी है और इसमें छह फ्लैट है। जिसमें 23 लोग रहते हैं। इसके अलावा ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग के अलावा एक कमरा है।

जिसमें कैलाश देवी अपनी बेटी और नातिनों के साथ रहती थी। तड़के करीब 3 बजे पार्किंग में खड़ी गाड़ियों में अचानक आग लग गई। आग भड़कने से पहले फ्लैटों में धुआं भर गया। इस बात की जानकारी मिलने के बाद जब लोगों ने नीचे आने की कोशिश की तो आग भयावह रूप ले गई।

सिमरन की बहादुरी से बच गई कई लोगों की जान

पार्किंग में खड़ी दो कार, तीन स्कूटी और चार बाइक जलकर राख हो गई। वाहनों में आग लगने की वजह से लोग नीचे नहीं आ पाए। उनलोगों ने उपर जाकर नीचे छलांग लगा दी।

सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची दमकल की दो गाड़ियों ने पौने घंटे में आग पर काबू पा लिया। आग बुझाने के दौरान एक दमकल कर्मी बलराज खोखर भी जख्मी हो गए।

हादसे में मरने वाली कैलाश की नातिन सिमरन की बहादुरी और सुझबूझ की वजह से कई लोगों की जान बच गई। आग लगने के बाद नौंवी कक्षा में पढ़ने वाली सिमरन अचानक उठ गई और अपने परिवार के सदस्यों को उठाया।

सिमरन की बहादुरी से बची इसकी जान

कमरे में धुआं भरे होने की वजह से उसने सभी को बाहर निकलने के लिए कहा। बाहर आने के बाद उसने भयावह नजारा देखा। वह अपनी जान की परवाह किए बगैर सभी फ्लोर की डोरबेल बजाई और उपर की फ्लोर की तरफ भागकर सभी को आवाज लगाई।

लोग भागकर नीचे आए लेकिन आग की लपटों की वजह से बाहर नहीं निकल पाए। उसके बाद लोगों ने फ्लोर से गली में छलांग लगा दी और कुछ बिजली के खंभे के सहारे किसी तरह नीचे उतरे।

स्थानीय लोगों के मुताबिक सिमरन ने जान जोखिम में डालकर लोगों को सचेत नहीं किया होता तो मरने वालों की संख्या काफी होती। स्थानीय विधायक भावना गौड़ ने सिमरन का नाम बहादुरी पुरस्कार के लिए भेजने की बात कही। वहीं जिला पुलिस उपायुक्त सुमन गोयल ने भी सिमरन की तारीफ की।
विज्ञापन

बेटे को रजाई में बांधकर फेंका और खुद फंस गया

स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ ही पलों में आग की लपटें दूसरी फ्लोर तक पहुंच गई। दूसरी फ्लोर पर रहने वाले जगदीप को आग लगने की जानकारी बहुत देर से लगी। जब फ्लोर पर आग फैल गई तो उनके निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला।

जगदीप की पत्नी आग की चपेट में आ गई थी। उसने किसी तरह उसे आग की लपटों से बाहर निकाला और नीचे छलांग लगाने के लिए कहा। इंदू ने गली में छलांग लगा दी।

उसके बाद जगदीप ने अपने बेटे को रजाई में लपेट कर नीचे फेंक दिया। इस दौरान वह आग में घिर गया और उसकी झुलसने से मौत हो गई। अस्पताल पहुंचने के बाद उसके बेटे की भी मौत हो गई। जबकि इंदू जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें