कनेक्टिंग ट्रेन के यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है। दरअसल यात्रियों को एयरपोर्ट की तर्ज पर ही स्टेशन के प्लेटफार्म में एक घंटे पहले प्रवेश दिया जा रहा है। ऐसे में अन्य राज्यों से दिल्ली पहुंचे यात्रियों को परिसर में ही घंटों बीताना पड़ता है। बड़ी संख्या में पुरानी दिल्ली स्टेशन पर यात्री बंगाल व आसाम से यात्रा कर सुबह पहुंचे थे। उनकी अगली ट्रेन गुजरात जाने के लिए दोपहर साढ़े तीन बजे थी। यात्री मीना रहेजा का कहना था कि स्टेशन में प्रवेश ही नहीं मिल रहा है। सभी विश्रामालय प्लेटफार्म पर बने हुए है। ऐसे में यात्रियों को विश्रामालय में बैठने की इजाजत नहीं मिल पा रही है।
टिकट के सॉफ्टवेयर में बदलाव
यात्रा के लिए अब गंतव्य जगह का भी पता यात्रियों को देने का नियम अनिवार्य कर दिया गया है। प्रोफार्मा में पूरा पता, मकान नंबर, गली नंबर, कॉलोनी, तहसील का पूरा विवरण देना पड़ रहा है। सेंटर फार रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम ने आईआरसीटीसी के सॉफ्टवेयर में बदलाव कर दिया है। इसी तरह काउंटर से मिलने वाले टिकट के साफ्टवेयर में भी बदलाव किया गया है।
60 लाख मजदूरों को पहुंचाने में रेलवे बना मददगार
लॉकडाउन की वजह से जगह-जगह फंसे करीब 60 लाख मजदूरों को उनके गृह प्रदेश पहुंचाने में रेलवे ने अहम भूमिका निभाई है। एक मई मजदूर दिवस के दिन से बड़ी संख्या में श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाकर रेलवे ने मजदूरों की राह आसान की। रेल मंत्रालय के डाटा के अनुसार इस दौरान 4197 ट्रेनें चलाई गई। सिर्फ मई में 50 लाख से ज्यादा लोग पहुंचाए गए। श्रमिक स्पेशल के अलावा रेलवे द्वारा 12 मई से 15 जोड़ी विशेष राजधानी ट्रेनों और 1 जून से 100 जोड़ी विशेष मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों का समयसारणी के हिसाब से परिचालन शुरू कर दिया गया है।