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Delhi NCR News: कानपुर और झांसी के लिए जिस भाई पर था भरोसा, उसी ने बेच दी सांसे

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भाई ने पैसे के लालच में रची थी लूट की साजिश, यूपी से लेकर आया था बदमाश
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। कश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर प्रभात की लूट और हत्या का पुलिस ने खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि प्रभात के चचेरे भाई ओम ने पैसे के लालच में यह साजिश रची थी। पुलिस ने सात आरोपियों में से चार को गिरफ्तार किया है, जिनसे करीब 2.30 लाख रुपये बरामद हुए हैं।



सेंट्रल पुलिस उपायुक्त निहारिका भट्ट ने बताया कि ओम ने कानपुर में बैठकर योजना बनाई और उत्तर प्रदेश से बदमाश बुलाए। ओम को प्रभात के कामकाज और पैसे इकट्ठा करने की पूरी जानकारी थी। उसे पता था कि प्रभात कब और किस रास्ते से रकम लेकर निकलता है। इसी जानकारी का फायदा उठाकर ओम ने रेकी की और लूट की योजना बनाई। वारदात के वक्त भी ओम दूसरे ई-रिक्शा में बैठकर प्रभात की गतिविधियों पर नजर रखे हुए था। प्रभात के ई-रिक्शा से निकलते ही ओम ने बदमाशों को सूचना दी। सलीमगढ़ किले के पीछे नीली छतरी मंदिर अंडरपास के पास चार बदमाशों ने ई-रिक्शा रोका। उन्होंने पैसों से भरा बैग लूटने की कोशिश की। प्रभात ने विरोध किया तो बदमाशों ने चाकू से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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सीसीटीवी से मिला सुराग

सीसीटीवी फुटेज में एक सफेद स्विफ्ट कार संदिग्ध दिखी, जो झांसी निवासी दीपू के नाम पर पंजीकृत थी। दीपू की कॉल डिटेल रिकॉर्ड में ओम का नंबर मिला, जो प्रभात के भी संपर्क में था। पुलिस ने कानपुर से ओम को गिरफ्तार किया और पूछताछ के आधार पर झांसी से दीपू व एक नाबालिग को भी पकड़ा।
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फर्जी नंबर प्लेट से गुमराह करने की कोशिश
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपियों ने पुलिस को चकमा देने के लिए वारदात में इस्तेमाल स्विफ्ट कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगा रखी थी। कार पर लगा नंबर नोएडा निवासी भगत सिंह के नाम पर पंजीकृत था। लेकिन उस नंबर पर दर्ज असली कार सीसीटीवी में दिख रही कार से बिल्कुल अलग निकली। इसी अंतर ने पुलिस को फर्जी नंबर प्लेट के इस्तेमाल का सुराग दिया और आरोपियों की चाल बेनकाब हो गई।
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