मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) ने कहा कि सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति के केवल शराब पीने से ही लापरवाही साबित नहीं होती। पीठासीन अधिकारी शिरीष अग्रवाल ने 2018 में हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक को 30.77 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट (एमएलसी) में सचिन की सांस से शराब की गंध आने का उल्लेख है, लेकिन रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने तय सीमा से अधिक शराब पी रखी थी। इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि वह नशे की हालत में वाहन चला रहे थे।
पीठासीन अधिकारी शिरीष अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने तय सीमा के भीतर या उससे अधिक शराब भी पी हो, तब भी दूसरे वाहन चालक को तेज और लापरवाही से वाहन चलाने का अधिकार नहीं मिल जाता। केवल शराब पीना ही यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि दुर्घटना में पीड़ित की भी लापरवाही थी।
उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे साबित हो कि सचिन तेज या लापरवाही से बाइक चला रहे थे या उन्होंने हेलमेट नहीं पहना था। ट्रक चालक इस मामले में सबसे अहम गवाह हो सकता था, लेकिन वह ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं हुआ। दुर्घटना ट्रक चालक की तेज और लापरवाही से ड्राइविंग के कारण हुई
आदेश में कहा गया कि भले ही दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट न पहनना कानून का उल्लंघन है। इसी तरह दुर्घटना के समय ड्राइविंग लाइसेंस न होना भी इस मामले में पीड़ित की लापरवाही साबित नहीं करता। ट्रिब्यूनल ने माना कि दुर्घटना ट्रक चालक की तेज और लापरवाही से की गई ड्राइविंग के कारण हुई। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने ट्रक चालक और मालिक को सचिन धवन को ब्याज सहित 30.77 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।