रक्षाबंधन अब सिर्फ भाई-बहन तक सीमित नहीं है। त्योहार के साथ बाजार में रिश्तों की खरीदारी भी बढ़ रही है। दिल्ली के बाजारों में इस बार भाभी के लिए लुंबा राखी की मांग दिखाई दे रही है। भाई के लिए राखी लेने पहुंच रही महिलाएं भाभी के लिए भी अलग राखी खरीद रही हैं। इससे राखी बाजार को नया ग्राहक वर्ग मिल रहा है।
भाभी की चूड़ी पर बंधी लुंबा राखी एक भावनात्मक संदेश देती है। रिश्ते सिर्फ खून से नहीं बनते। प्रेम, सम्मान और अपनापन भी उन्हें मजबूत करते हैं। यही वजह है कि भाई की कलाई के साथ अब भाभी की चूड़ी भी रक्षाबंधन के बाजार का हिस्सा बन रही है।
चूड़ी और कंगन में बांधते हैं लुंबा
भाभी के लिए बांधी जाने वाली राखी को लुंबा राखी या चूड़ा राखी कहा जाता है। इसे भाई की तरह कलाई पर नहीं बांधा जाता। इसे भाभी की चूड़ी या कंगन में लगाया जाता है। यह ननद-भाभी के प्रेम, सम्मान और अपनत्व का प्रतीक मानी जाती है।सदर बाजार के राखी कारोबारी राकेश बंसल ने कहा कि पहले लुंबा राखी की मांग कुछ खास परिवारों तक थी। अब दूसरे ग्राहक भी इसे पसंद कर रहे हैं। भाई की राखी के साथ भाभी के लिए भी राखी पूछी जा रही है।
राजस्थान से निकली परंपरा, अब दिल्ली के बाजार में
लुंबा राखी की परंपरा खासतौर पर राजस्थान और मारवाड़ी परिवारों से जुड़ी मानी जाती है। इसका कोई निश्चित ऐतिहासिक आरंभ-बिंदु प्रमाणित नहीं है। इसका भाव जरूर साफ है। भाई की पत्नी को भी परिवार के प्रेम के बंधन में शामिल करना।
विवाह के बाद भाभी परिवार का अहम हिस्सा बनती है। वह सुख-दुख में भाई के साथ खड़ी रहती है। परिवार की जिम्मेदारियों में भी भागीदारी निभाती है। इसलिए कई परिवारों में ननद अब भाई के साथ भाभी को भी राखी बांधती हैं।
मोती, कुंदन और फूलों से सजी लुम्बा राखियां
बाजार में लुंबा राखी की कई डिजाइन मौजूद हैं। मोती, कुंदन, जरी, रेशम और फूलों से सजी राखियां पसंद की जा रही हैं। ब्रेसलेट और चूड़ा स्टाइल भी खरीदे जा रहे हैं। कई दुकानदार इन्हें छोटे गिफ्ट पैक के साथ बेच रहे हैं।
भाभी मेरे लिए दोस्त जैसी हैं। इसलिए भाई के साथ उनके लिए भी लुंबा राखी ली है। चूड़ी में बंधी राखी बहुत सुंदर लगती है। -रितु
भाई के लिए हर साल राखी लेते हैं। अब भाभी के लिए भी लुंबा राखी लेना अच्छा लगता है। इससे रिश्ते में अपनापन महसूस होता है। -रश्मीत
रिश्ते के साथ बढ़ रहा कारोबार
दिल्ली के कारोबारी परमजीत सिंह ने बताया कि अब ग्राहक सिर्फ भाई के लिए राखी नहीं खरीद रहा। परिवार के दूसरे रिश्तों के लिए भी विकल्प तलाश रहा है। लुंबा राखी बाजार के लिए नया सेगमेंट बन रही है। रक्षाबंधन का यह बदलाव कारोबार के लिए भी अहम है। एक ग्राहक की खरीदारी में अब एक और उत्पाद जुड़ रहा है। वहीं परिवार के लिए इसका मतलब सिर्फ खरीदारी नहीं है।