नगर निगम का कार्यालय मंगलवार को अखाड़े में तब्दील हो गया। वाहन चालकों द्वारा पार्षदों को चोर कहकर नारेबाजी किए जाने से पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने नारेबाजी कर रहे निगम वाहन चालकों से मारपीट की।
पार्षदों ने उनकी दरी उठाकर बाहर फेंक दी। नगर आयुक्त ने बिना पूर्व सूचना के धरना देने और अभद्रता करने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार कराने के लिए तीन अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी हैं।
वाहन चालक सोमवार को सदन में डीजल चोरी का मुद्दा उठाए जाने से नाराज थे। उनका आरोप था कि पार्षद उन पर डीजल चोरी का आरोप लगा रहे हैं। इससे खफा वाहन चालक संघ के महामंत्री सलीम व अन्य कर्मचारी सदन के बाद सुबह से ही धरने पर बैठे थे।
कोई भी पार्षद सदन से बाहर आता तो वाहन चालक ‘सभी पार्षद चोर हैं, सभी कमीशन खोर हैं’ के नारे लगाने शुरू कर देते। लंच टाइम के बाद तक भी वाहन चालक नहीं उठे और नारेबाजी करते रहे तो पार्षदों का गुस्सा भड़क गया।
सदन से बाहर निकलकर पार्षदों ने वाहन चालकों से मारपीट की। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और निगम के अन्य कर्मचारियों ने बीच-बचाव किया।
आज नहीं उठेगा कूड़ा, पार्षदों के खिलाफ तहरीर दी
नगर निगम वाहन चालक के महामंत्री सलीम का कहना है कि संगठन के पदाधिकारियों ने सदन में जाकर अधिकारियों से मुलाकात करने का प्रयास किया था। लेकिन उन्हें रोक दिया गया। मारपीट करने वाले पार्षदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज न हुई तो वह बुधवार से चक्का जाम करेंगे।
बुधवार को शहर का कूड़ा नहीं उठाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मारपीट करने वाले पार्षदों के खिलाफ सिहानी गेट थाने में तहरीर दी गई है। एसएचओ अशोक सिसौदिया का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। अभी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है।