-चुनाव से ठीक पहले ऑडिट रिपोर्ट जारी करने की मंशा पर उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) में वित्तीय अनियमितता संबंधी ऑडिट रिपोर्ट को तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. गिरीश त्यागी ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने 17 मई को होने वाले डीएमसी प्रतिनिधि चुनाव से पहले रिपोर्ट जारी करने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह जानबूझकर भ्रष्टाचार की झूठी जन धारणा बनाने का प्रयास है। जबकि ऐसा कोई भ्रष्टाचार साबित नहीं हुआ है। सेवा विस्तार का मुद्दा चुनिंदा और भ्रामक तरीके से उठाया गया है।
रजिस्ट्रार के रूप में केवल काउंसिल का कर्मचारी था। एक कर्मचारी स्वयं को सेवा विस्तार नहीं दे सकता है। सेवा विस्तार को विधिवत गठित 25 सदस्यीय डीएमसी ने अपनी सक्षम निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से अनुमोदित किया था। अब झूठे आरोप लगाने का प्रयास कर रहे कई व्यक्ति स्वयं उन निर्णयों में भागीदार थे। लगभग पांच वर्षों की पूरी सेवा अवधि के दौरान सेवा जारी रखने या विस्तार के संबंध में कोई आपत्ति नहीं उठाई गई।
डॉ. गिरीश त्यागी ने कहा कि डीएमसी में डीएमए प्रतिनिधि के चुनाव से ठीक 36 घंटे पहले रिपोर्ट जारी करना गंभीर प्रश्न उठाता है। इस स्तर पर ऑडिट टिप्पणियों का चुनिंदा सार्वजनिक प्रदर्शन राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होता है। मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। डॉ. गिरीश ने सवाल करते हुए पूछा कि आखिर ऑडिट रिपोर्ट सरकार को कब सौंपी। अगर फैसले में कोई गड़बड़ी थी तो सरकार ने पांच-छह वर्षों तक इस पर आपत्ति क्यों नहीं जताई।
नियुक्ति और सेवा समाप्ति का अधिकार काउंसिल के पास है। रजिस्ट्रार केवल परिषद के फैसले का पालन कर रहा था। न्यायपालिका उचित समय पर सबके सामने सच्चाई उजागर करेगी। झूठे प्रचार चाहे वह सरकार द्वारा ही क्यों न किया गया हो, ईमानदार कार्यकर्ताओं पर दबाव न डाले और उन्हें डराए नहीं। 17 मई को होने वाले चुनाव में डॉ. गिरीश त्यागी भी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में है। उन्होंने कहा कि नामांकन न करने को लेकर भी दबाव बनाया गया था।