स्वाइन फ्लू का डर लोगों में इस कदर हावी हो गया है कि हल्के सर्दी-जुकाम या फीवर होने पर भी लोग स्वाइन फ्लू का टेस्ट करा रहे हैं।
हर संदिग्ध मरीज का सैंपल लिए जाने की वजह से दिल्ली लैब में काफी लोड बढ़ गया है। इसकी वजह से केंद्र सरकार यह निर्देश दे रही है कि संदिग्ध मरीजों को अब लक्षणों के आधार पर दवा दी जाए।
सर्दी-जुकाम के हर मरीज का सैंपल दिल्ली टेस्ट के लिए भेजा जा रहा है। पिछले एक महीने में गाजियाबाद से दिल्ली लैब में सबसे अधिक सैंपल टेस्ट के लिए भेजे गए हैं।
जिसमें से 25 सैंपल में से पांच की रिपोर्ट पॉजिटिव और बीस की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। कई बार तो दस के दस सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है।
इसको देखते हुए केंद्र सरकार का कहना है कि स्थानीय स्तर पर ही चिकित्सक लक्षणों को देखते हुए स्वाइन फ्लू का इलाज करें।
अगर मरीज गंभीर हो और केटेगरी सी में आता है तभी सैंपल दिल्ली भेजा जाए।
केंद्र सरकार ने पहले भी स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए गाइडलाइन जारी की थी जिसमें स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए तीन केटेगरी बनाई गई है जिसमें बी केटेगरी के मरीजों का सैंपल टेस्ट जरूरी नहीं है।
डीएमओ जीके मिश्रा ने बताया कि दिल्ली लैब से यह निर्देश तो दिया गया है लेकिन लिखित में आदेश न होने की वजह से अभी इसको लागू नहीं किया जा सका है। अभी सभी संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए जा रहे हैं।