फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi NCR News: त्योहार की सेल में ठगी का खेल

विज्ञापन
विज्ञापन
नोट: साइबर विशेषज्ञ, साइबर डीसीपी और पीड़ित का बयान अलग से फोटो के साथ है
विज्ञापन


-सोशल मीडिया पर सजे फर्जी बाजार, पैसे कट रहे पर सामान नहीं पहुंच रहा
रील्स और शॉर्ट्स में दो-तीन रुपये में कॉस्मेटिक सामान बेचने के दावे, सस्ते ऑफर के लालच में लग रही लोगों की जेब पर चपत



सचिन कुमार

नई दिल्ली। इंस्टाग्राम पर एक लिंक देखकर 24 वर्षीय सत्यम ने कुर्ता ऑर्डर किया। वेबसाइट पर कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प नहीं था, इसलिए उन्होंने यूपीआई से भुगतान कर दिया। 25 दिन से ज्यादा बीत गए, लेकिन कुर्ता नहीं पहुंचा। अब ऑर्डर का हाल जानने के लिए वेबसाइट खोलते हैं तो वह दिखाई ही नहीं देती। सत्यम की तरह 27 वर्षीय हर्षित भी ठगी का शिकार हुए। यूट्यूब शॉर्ट्स पर 150 रुपये किलो दिवाली की मिठाई का ऑफर देखकर उन्होंने तीन किलो मिठाई मंगाई। 500 रुपये का भुगतान होते ही वेबसाइट बंद हो गई। अब मिठाई मिली, न पैसे वापस आए।

त्योहारों पर सस्ते सामान और भारी छूट की तलाश लोगों को सोशल मीडिया के ऐसे बाजार तक ले जा रही है, जहां आकर्षक ऑफरों के पीछे ठगी का खेल चल रहा है। इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर नामी ब्रांड के उत्पाद बेहद कम कीमत पर बेचने के दावे किए जा रहे हैं। कहीं दो-तीन रुपये में कॉस्मेटिक सामान देने का लालच है, तो कहीं भारी छूट के साथ घर बैठे खरीदारी का वादा। इन विज्ञापनों को देखकर लोग वेबसाइट पर पहुंचते हैं, सामान पसंद करते हैं और ऑनलाइन भुगतान कर देते हैं। लेकिन भुगतान के बाद सामान नहीं पहुंचने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
विज्ञापन



दो-तीन रुपये में कॉस्मेटिक सामान का लालच


सोशल मीडिया पर कई नामी कंपनियों के कॉस्मेटिक उत्पाद बेहद कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं। कहीं दो-तीन रुपये में सामान देने का लालच है, तो कहीं 80 से 90 प्रतिशत तक छूट का वादा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कॉस्मेटिक उत्पादों की कीमत इतनी कम दिखाई जाती है कि ग्राहक उन्हें खरीदने के लिए आकर्षित हो जाते हैं। इसके बाद वह वेबसाइट पर ऑर्डर और भुगतान की प्रक्रिया पूरी करते हैं। परेशानी तब शुरू होती है, जब तय समय पर सामान नहीं पहुंचता और विक्रेता से संपर्क करने का कोई ठोस रास्ता नहीं मिलता।
-

फर्जी वेबसाइटों का जाल
ठगी का एक तरीका असली ब्रांड या ऑनलाइन शॉपिंग मंच जैसी दिखने वाली वेबसाइट तैयार करना है। इन पर महंगे उत्पादों की कीमत काफी कम दिखाई जाती है। त्योहार पर बचत की उम्मीद में ग्राहक भुगतान कर देते हैं, लेकिन बाद में ऑर्डर घर नहीं पहुंचता। कई बार ग्राहक को न सामान मिलता है और न ही रिफंड के संबंध में ठीक जवाब। कुछ मामलों में वेबसाइट पर दिया गया संपर्क विवरण भी उपयोगी साबित नहीं होता। ऑनलाइन खरीदारी के इस तरीके में ग्राहकों के सामने दोहरी परेशानी आती है। एक तरफ उनकी रकम फंस जाती है, वहीं दूसरी तरफ शिकायत के लिए सही विक्रेता की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।


किसी भी आकर्षक ऑफर पर भरोसा करने से पहले वेबसाइट का पता, विक्रेता की जानकारी, संपर्क विवरण और सामान लौटाने की शर्तें जरूर जांचें। अनजान लिंक पर बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा करने से बचें।
- शोभित डी सक्सेना, जिला पुलिस उपायुक्त







त्योहार की सेल में ठगी का खेल खबर के साथ बातचीत


त्योहारों पर सस्ते सामान के नाम पर फर्जी लिंक फैलाए जाते हैं। ग्राहक भुगतान करने से पहले वेबसाइट और विक्रेता की जानकारी जांचें। ठगी होने पर तुरंत बैंक को सूचना दें और 1930 पर शिकायत करें।


-पवन दुग्गल, साइबर विशेषज्ञ


सोशल मीडिया पर सस्ते सामान के फर्जी ऑफर से सदर बाजार के व्यापारियों की छवि भी खराब होती है। वीडियो देखकर ग्राहक बाजार आते हैं और कम पैसे में सामान मांगते हैं। सामान नहीं मिलने पर निराश हो जाते हैं।
विज्ञापन



-परमजीत सिंह पम्मा, अध्यक्ष, सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन


इंस्टाग्राम पर कुर्ते का ऑफर देखकर ऑर्डर किया था। कैश ऑन डिलीवरी नहीं था, इसलिए यूपीआई से पैसे दे दिए। 25 दिन से ज्यादा हो गए, लेकिन कुर्ता नहीं मिला। अब वेबसाइट भी नहीं खुल रही है।
- सत्यम, पीड़ित
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें