मौसम में बदलाव के कारण वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। अस्पतालों में मौसमी बुखार से लेकर टाइफाइड, गले में संक्रमण, कान में दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत लेकर मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। डॉक्टर जल जनित बीमारियों से बचाव को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
लोकनायक अस्पताल की उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रितु सक्सेना ने बताया कि मौजूदा मौसम बैक्टीरिया और वायरस संबंधी बीमारियों के अनुकूल है। मौसम में उमस है। बरसात के शुरू होने पर यह परेशानी और ज्यादा बढ़ जाएगी। अभी टाइफाइड, वायरल बुखार, हेपेटाइटिस, खांसी-जुकाम, उल्टी और दस्त लगने के मरीज जरूर सामने आ रहे हैं। इसमें करीब 5-10 फीसदी का इजाफा हुआ है, जिसकी चपटे में बच्चे से लेकर वरिष्ठ भी आ रहे है। ऐसे मौसम में ज्यादातर बीमारियां बाहर का खाने-पीने से होती है।
लोग यह बरतें सावधानी
- आसपास गंदा पानी जमा न होने दें
- बाहर के कटे फल और तला-भूना खाने से परहेज करें
- एसी का तापमान सामान्य रखें
- बाहर से आने पर एकदम ठंडा पानी न पीयें
- एलर्जी से बचाव के लिए चेहरे पर मास्क लगाकर रखें
- पानी को उबालकर पीयें
पेट का संक्रमण होता है सबसे अधिक
स्वामी दयानंद अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ग्लैडबिन त्यागी ने बताया कि ऐसे मौसम में सबसे ज्यादा पेट का संक्रमण होता है। सर्दी और जुकाम की समस्या भी लोगों में देखने को मिलती है। त्वचा और आंखों में संक्रमण की समस्या के मरीज भी सामने आते हैं।
मौसम में नमी के कारण बढ़ी दिक्कत
डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल के ईएनटी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि प्री मानसून में नमी के कारण पोलन एलर्जी के मरीज सामने आ रहे हैं। इसमें छींक अधिक आने, नाक के बहने और बंद हो जाने की समस्या मरीजों में देखने को मिल रही है। गले में खराश, शरीर में दर्द महसूस होने की समस्या को भी मरीज बयां कर रहे है। साथ ही कान में दर्द होने की शिकायत भी लेकर मरीज पहुंच रहे हैं।