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बच्चों के भरण पोषण की जिम्मेदारी सदैव पिता पर : हाईकोर्ट

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-पत्नी के नौकरी करने के बावजूद अदालत ने रेलवे में नौकरी करने वाले पिता को बच्चों के भरण पोषण के लिए रकम देने का दिया निर्देश
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- अदालत ने पत्नी की भरण पोषण प्राप्त करने की मांग को कर दिया खारिज

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने मासिक भरण पोषण के मामले में बच्चे को पिता की जिम्मेदारी बताया है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने फैसले में रेलवे कर्मचारी को अपने बच्चे के लिए मासिक 16 हजार रुपये देने का निर्देश दिया है। अदालत ने पत्नी के 20 हजार रुपये के भरण पोषण की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने पत्नी की वित्तीय स्थिति के स्पष्ट प्रमाण न होने को आधार माना।
बताया गया कि जोड़े ने 27 नवंबर 2009 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया और 28 अगस्त 2010 को उनके एक बच्चे का जन्म हुआ। पत्नी का दावा था कि शादी के बाद से ही उसे पति और ससुराल वालों द्वारा शारीरिक, मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इस कारण उसे अपने माता-पिता के सहारे रहना पड़ा। उसने भरण-पोषण के लिए याचिका दायर की, जिसमें 30,000 (20,000 स्वयं के लिए और 10,000 बच्चे के लिए) की मांग की गई। पत्नी ने कहा कि वह उत्तर प्रदेश के एक सरकारी स्कूल में अस्थायी शिक्षिका के रूप में 10,000 मासिक कमाती है, लेकिन उसके आयकर रिटर्न (आईटीआर) में 4 लाख वार्षिक आय दर्शाई गई।
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दूसरी ओर, पति, जो भारतीय रेलवे में कार्यरत है, ने दावा किया कि पत्नी ने अपनी वास्तविक आय छिपाई और बिना उचित कारण के वैवाहिक घर छोड़ दिया। परिवार न्यायालय ने बच्चे के लिए 16,000 मासिक भरण-पोषण स्वीकार किया, जो तब तक जारी रहेगा जब तक बच्चा आत्मनिर्भर न हो जाए, लेकिन पत्नी को स्वयं के लिए भरण-पोषण से वंचित रखा। हाईकोर्ट ने पत्नी के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसने अपनी वर्तमान आय के प्रमाण, जैसे हाल के वेतन पर्ची या फॉर्म-16, प्रस्तुत नहीं किए। अदालत ने कहा, भरण-पोषण के लिए पत्नी की अक्षमता साबित करने का प्राथमिक आधार स्पष्ट और विश्वसनीय साक्ष्य होना चाहिए, जो इस मामले में अनुपस्थित है।
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