-राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ ने दिल्ली सरकार से लगाई गुहार
-संघ ने सरकार से किया आग्रह केंद्र से विशेष छूट की मांग की जाए
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर सीटीईटी या टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता ना थोपी जाए। राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ ने इस अनिवार्यता विरोध करते हुए दिल्ली सरकार से गुहार लगाकर हस्तक्षेप की मांग की है। संघ ने सीएम रेखा गुप्ता को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व भेजकर केंद्र सरकार के समक्ष विशेष एकमुश्त छूट की सिफारिश करने का आग्रह किया है।
सरकारी स्कूल शिक्षक संघ (जीएसटीए) के महासचिव अजय वीर यादव ने कहा कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के परिणामस्वरूप ऐसे हजारों शिक्षक प्रभावित होंगे, जिन्हें वर्षों पहले उस समय लागू भर्ती नियमों के तहत विधिवत नियुक्त किया गया था और जो लंबे समय से सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य कर रहे हैं। संघ की ओर से मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भेजे ज्ञापन में कहा गया है कि भर्ती नियम नियुक्ति के समय लागू होते हैं और एक बार विधिवत नियुक्ति होने के बाद शिक्षक की सेवा का मूल्यांकन उसके कार्य निष्पादन, शैक्षणिक परिणामों व अन्य मानकों के आधार पर किया जाता है।
ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद पुन: पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न ही न्यायसंगत है और न ही व्यावहारिक है। अन्य सरकारी सेवाओं में कर्मचारियों को नई पात्रता परीक्षा पास करने के लिए बाध्य नहीं किया जाता। ऐसे में केवल शिक्षकों के लिए ऐसी व्यवस्था उचित नहीं है। जीएसटीए ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि दिल्ली सरकार इस मुद्दे को केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाए तथा कैबिनेट प्रस्ताव के माध्यम से उन शिक्षकों के लिए विशेष राहत की अनुशंसा करे जो अपनी नियुक्ति के समय लागू नियमों के अनुसार योग्य पाए गए थे। मालूम हो कि हाल में ही सुप्रीम कोर्ट ने पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने की अनिवार्यता में कोई भी छूट देने से इंकार कर दिया है। साथ ही जो शिक्षक अभी कार्यरत हैं उनके लिए टीईटी पास करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है, पहले यह समय सीमा 31 अगस्त 2027 थी।