समाजसेवी अन्ना हजारे ने बेशक सियासत से दूरी बनाये रखी है लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल काम के दम पर अपने गुरु का दिल जीतने की कोशिश करेंगे।
केजरीवाल करीब पांच महीने का रिपोर्ट कार्ड अन्ना के सामने पेश करेंगे। इस दौरान अन्ना को मौके का मुआयना भी कराया जाएगा। एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक, 9 अगस्त से अन्ना दिल्ली सरकार के कामों से रूबरू होंगे।
दरअसल, अन्ना हजारे की सियासी संकल्पना स्वराज के इर्द-गिर्द घूमती है। महाराष्ट्र के रालेगांव सिद्धि में इसका अन्ना ने बखूबी इस्तेमाल भी किया है। दूसरी तरफ दिल्ली सरकार अपने फैसलों में जनभागीदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
इसमें सबसे अहम मोहल्ला सभाएं हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष का बजट तैयार करते समय पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 11 विधानसभाओं में इसका प्रयोग भी किया गया।
योजनाओं से खुश होंगे अन्ना !
इसका बजट 20 करोड़ रुपये का था। हर विधान सभा में 40 मोहल्ला सभाएं बुलाई गईं। प्रत्येक मोहल्ला सभा को 20 लाख रुपये तक खर्च का अधिकार भी दिया गया।
वहीं, मोहल्ले में बेहतर इलाज के लिए ‘आप का मोहल्ला क्लीनिक’ चल रहा है। जबकि सरकार का स्वराज व जनलोकपाल बिल का ड्राफ्ट तैयार है। फिर, दो महीने में आप कैंटीन भी खोलने की सरकार की योजना है।
इसमें पांच से दस रुपये में ब्रेकफास्ट से डिनर तक मिलेगा। मुख्यमंत्री केजरीवाल की कोशिश जनभागीदारी बढ़ाने वाले कामों से अपने गुरु को रूबरू कराने की है। रविवार देर रात अन्ना हजारे से हुई मुलाकात में इसकी चर्चा भी हुई।
जनलोकपाल बिल पर होगी चर्चा
एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि अन्ना हजारे 9 अगस्त को दिल्ली वापस लौट रहे हैं। इस दौरान अन्ना को स्वराज मॉडल पर चल रही मोहल्ला सभाएं दिखाई जाएंगी।
वहीं, अन्ना मोहल्ला क्लीनिक का भी दौरा करेंगे। इसके अलावा उनसे आप कैंटीन व स्वराज व जनलोकपाल बिल पर भी चर्चा होगी। पार्टी रणनीतिकार मान रहे हैं कि अन्ना भले ही राजनीति से दूर रहें।
लेकिन जमीनी हकीकत देखने के बाद वह दिल्ली सरकार के कामों को नजरअंदाज नहीं कर सकेंगे। इसका फायदा अन्ना के किसान आंदोलन व वन रैंक वन पेंशन मूवमेंट में हो सकता है। इस दौरान अन्ना को खुद ही अपने शिष्य के कामों की चर्चा करने पर मजबूर होना पड़ेगा।