जनकपुरी के स्कूल में तीन साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न का मामला
-अदालत ने आरोपी को दी थी जमानत, परिजनों से स्कूल के केयरटेकर पर लगाया था दुष्कर्म करने का आरोप, बच्ची ने की थी आरोपी की पहचान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
जनकपुरी स्थित निजी स्कूल में तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी केयरटेकर को जमानत दी है। अदालत के आदेश की कॉपी देखने के बाद पुलिस ने आगे की कार्रवाई करने की बात कही है। उधर बच्ची के परिजनों ने स्कूल प्रबंधन के साथ साथ पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त शरद भास्कर ने बताया कि 1 मई को पीड़ित बच्ची की मां की शिकायत पर जनकपुरी थाने में यौन उत्पीड़न और पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। जिसमें बच्ची की मां ने आरोप लगाया कि स्कूल में रहने के दौरान स्कूल के ही किसी अज्ञात पुरुष कर्मचारी ने उनकी तीन साल की बेटी के साथ यौन उत्पीड़न किया। इस मामले में पीड़ित बच्ची ने आरोपी की पहचान की। उसके बाद पुलिस ने आरोपी 57 साल के केयरटेकर को गिरफ्तार कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सात मई को जमानत पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के कड़े विरोध के बावजूद अदालत ने आरोपी को जमानत दी। पुलिस अधिकारी ने कहा कि अदालत का आदेश प्राप्त होने और उसकी जांच करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस को अदालत के आदेश का अभी इंतजार है।
जानकारी के मुताबिक बच्ची अपने परिजनों के साथ विकासपुरी में रहती है। बच्ची जनकपुरी स्थित निजी स्कूल इसी सत्र में नर्सरी में दाखिला लिया था और 28 अप्रैल से स्कूल जाना शुरू किया था। परिजनों ने बताया कि पहले ही दिन स्कूल से लौटने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी। 29 अप्रैल को हालत में सुधार नहीं होने पर परिजन उसे स्कूल से घर ले आए। शाम 4.30 बजे बच्ची दर्द से कराहने लगी। तब बच्ची ने मां से सारी बात बताई। परिजन उसे तुरंत पास के अस्पताल में लेकर गए। जहां डॉक्टरों ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने बच्ची का मेडिकल करवाया। जांच के दौरान पुलिस बच्ची को लेकर स्कूल गई, जहां बच्ची ने आरोपी केयरटेकर की पहचान की। पुलिस अधिकारी के मुताबिक पहचान करने के बाद उन्होंने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। साथ ही परिजनों ने पुलिस पर भी बच्ची को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उसे कई घंटों तक थाने में बैठाकर रखा।