पुरानी पाइपलाइन बदलने और भूमिगत जलाशयों के पुनर्वास व निर्माण के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने मांगी अनुमति
केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने अदालत में पेश करने के लिए सौंपी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नारायणा और न्यू राजेंद्र नगर में पेयजल आपूर्ति से जुड़े बुनियादी ढांचे में सुधार का मामला उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन है। दिल्ली जल बोर्ड ने पुरानी पाइपलाइन बदलने और भूमिगत जलाशयों के पुनर्वास व निर्माण के लिए अनुमति मांगी है। इस पर केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने अनुपालन से संबंधित रिपोर्ट तैयार कर सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को भेजी गई है। अब इस रिपोर्ट को अदालत के समक्ष विचार के लिए रखने का अनुरोध किया गया है।
राजधानी के नारायणा और न्यू राजेंद्र नगर इलाके में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रस्तावित कार्यों पर उच्चतम न्यायालय में आगे की प्रक्रिया का इंतजार है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने दिल्ली जल बोर्ड की ओर से प्रस्तुत अनुपालन के संबंध में रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट 14 अक्तूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को लिखे पत्र के साथ भेजी गई है। पत्र पर सीईसी के सदस्य सचिव डॉ. सतीश सी. गारकोटी के हस्ताक्षर हैं।
मामला नारायणा भूमिगत जलाशय (यूजीआर) के पास स्थित डीडीए पार्क के भीतर मौजूदा पुरानी पाइपलाइनों को बदलने और नई राजेंद्र नगर के आर-ब्लॉक में पाइपलाइन बदलने की अनुमति से जुड़ा है। इसके अतिरिक्त नारायणा विहार और न्यू राजेंद्र नगर के आर-ब्लॉक में भूमिगत जलाशयों के पुनर्वास अथवा निर्माण का प्रस्ताव भी इसमें शामिल है।
यह आवेदन मूल रूप से रिट याचिका संख्या 4677/1985 से संबंधित है। अब इस मामले को स्वत: संज्ञान वाली रिट याचिका संख्या 13/2026 के रूप में पंजीकृत किया गया है। सीईसी की रिपोर्ट में दिल्ली जल बोर्ड की ओर से प्रस्तुत अनुपालन पर समिति की रिपोर्ट का उल्लेख है। समिति ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि रिपोर्ट को माननीय अदालत के समक्ष विचार के लिए रखा जाए।