महीनों से सूने पड़े ओखला पक्षी विहार की रंगत लौटने लगी है। दिसंबर के पहले सप्ताह में ही खाली पड़े घोंसलों में पक्षियों ने बसेरा जमा लिया है। झील में विचरण व किनारों बैठे पक्षी रंगत बढ़ाने में पूरा योगदान दे रहे हैं। एक सप्ताह में यहां पांच हजार से ज्यादा पक्षी आ चुके हैं।
इनकी चहचहाहट से पक्षी प्रेमियों में खुशी की लहर है। साइबेरियन व यूरोप के देशों के पक्षी यहां पहुंचे है। इनके पर्याप्त भोजन व शांति के लिए पक्षी विहार प्रबंधन ने खास इंतजाम किए हैं। घोंसलों को भी नया रूप दिया गया है।
बर्ड वाचर डे पर कुल 1035 पक्षी देखे गए थे। चार दिन बाद यह संख्या बढ़कर पांच हजार के पार पहुंच चुकी है। रेंजर आफिसर ईश्वर चंद ने बताया कि दिसंबर के अंत तक यह आंकड़ा हजार भी नहीं पहुंचा था। पिछले साल जो पक्षी आए यहां प्रवास के लिए आए थे वह दादरी, धनौरी व गुड़गांव वेटलैंड की तरफ चले गए थे।
लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। जो पक्षी यहां आ रहा है, वह यहीं प्रवास कर रहा है। पक्षियों को विचरण व सहवास करने के लिए एकांत माहौल भी दिया जा रहा है। साइबेरियन क्षेत्र से पहुंचे पक्षी साइबेरियन क्षेत्र से इस बार नार्दन सोब्लर, ग्रेले गूज, कामन कूट, पोरार्ड पोचार्ड, वीजन, वीजन डक, गडवाल, कामन पील, गल्स पक्षी यहां आ चुके हैं।