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Delhi NCR News: राजधानी में पुराने वाहनाें की संख्या कम, फिटनेस आधारित नियम हो लागू

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- दिल्ली में सीएक्यूएम के पुराने आंकड़ों पर विशेषज्ञों ने खड़े किए सवाल, 62 लाख पुराने वाहन दिल्ली में मैजूद नहीं
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) ने 1 जुलाई से पुराने वाहनों पर ईंधन प्रतिबंध लागू करने का निर्देश दिया था। सीएक्यूएम ने वाहन डाटाबेस के हवाले से दावा किया कि दिल्ली में 62 लाख पुराने वाहन हैं, जिनमें 41 लाख दोपहिया और 18 लाख कारें शामिल हैं। हालांकि, परिवहन विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इन आंकड़ों को गलत बताते हुए सवाल उठाए खड़े किए हैं। परिवहन विभाग के एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि 62 लाख पुराने वाहनों का आंकड़ा गलत है, क्योंकि डाटाबेस में 1980 के दशक के पुराने वाहनों का भी जिक्र है। उन्होंने बताया कि दोपहिया वाहनों की औसत आयु 15 से 20 साल होती है। 1995 के बाद पंजीकृत कुछ वाहन शायद अभी मौजूद हों, लेकिन उनकी संख्या बेहद कम है। उन्होंने बताया कि दोपहिया वाहन ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग इस्तेमाल करता है जो उनके लिए जीवन रेखा हैं।
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दिल्ली सरकार के पूर्व परिवहन अधिकारी और विशेषज्ञ अनिल छिकारा ने 62 लाख पुराने वाहनों के आंकड़े को पूरी तरह आधारहीन बताया। उन्होंने कहा पिछले एक दशक में हर दिन 1,000 से ज्यादा वाहनों के मालिकों ने नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लेकर अपने वाहनों को दिल्ली से अन्य राज्यों में ले गए हैं। वर्तमान में पुराने वाहनों, खासकर कारों की संख्या 62 लाख का पांचवां हिस्सा भी नहीं होगी। दोपहिया वाहन शायद 2-3 लाख हों, लेकिन इससे ज्यादा नहीं। उन्होंने बताया कि सीएक्यूएम को दिल्ली में पुराने वाहनों की वास्तविक स्थिति का गहन अध्ययन करना चाहिए। इसके बजाय, निजी वाहनों की समय-समय पर ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों पर जांच होनी चाहिए। जो वाहन प्रदूषणकारी या असुरक्षित पाए जाएं, उन्हें स्क्रैप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उम्र के आधार पर वाहन को स्क्रैप करना सही नहीं है।
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