बिल्डर प्रोजेक्ट में टैक्स चोरी रोकने की तैयारी वाणिज्य कर विभाग ने कर ली है। विभाग जल्द ही बिल्डरों से टैक्स लेने की नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है।
इसके अंतर्गत रजिस्ट्री के दौरान विभाग बिल्डर से एक से तीन प्रतिशत टैक्स एकमुश्त वसूल करेगा। बिल्डर इस टैक्स को ग्राहकों से लेंगे। इससे फ्लैट्स के भावी ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।
वाणिज्य कर मुख्यालय ने नए टैक्स सिस्टम को लागू करने की रूपरेखा तैयार कर ली है। अगले माह से नई व्यवस्था लागू हो सकती है।
अभी तक विभाग बिल्डरों से प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद बिल्डिंग मैटेरियल जैसे ईंट, सीमेंट, सरिया आदि की रसीदों को देखकर टैक्स लेता था। यह प्रक्रिया हर तीन से चार माह में की जाती थी।
इसमें अधिकारियों और बिल्डरों दोनों को कागजी कार्रवाई पूरी करने में परेशानी होती थी। अब नई व्यवस्था में कागजी कार्रवाई लगभग खत्म हो जाएगी। रीयल इस्टेट से विभाग को पूरा टैक्स मिलेगा। काम में पारदर्शिता आएगी और राजस्व बढ़ेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
विभाग पुरानी प्रक्रिया को खत्म करने जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारी स्तर पर यह सहमति बन गई है कि विभाग बिल्डरों से रजिस्ट्री के वक्त एकमुश्त टैक्स लेगा। बिल्डर यदि प्रांत के अंदर से माल मंगाकर अपार्टमेंट बन रहा है तो उससे एक प्रतिशत टैक्स लिया जाएगा। यदि वह दूसरे प्रांत से माल मंगाता है तब उस पर तीन प्रतिशत टैक्स लगेगा। हालांकि इससे फ्लैट के रेट बढ़ेंगे क्योंकि बिल्डर ग्राहक से ही टैक्स वसूलकर जमा कराएंगे।
- आरएन श्रीवास्तव, एडिशनल कमिश्नर वाणिज्य कर विभाग
क्या कहते हैं बिल्डर
पूर्व की व्यवस्था में टैक्स का कैलकुलेशन और कागजी कार्रवाई में खासी परेशानी होती थी। नई व्यवस्था में निश्चित तौर पर अधिकारियों और डेवलपर्स को राहत मिलेगी। एकमुश्त टैक्स से बिल्डर को भी पता होगा कि उसे कितना टैक्स देना है। टैक्स का भार फ्लैट्स की लागत पर पड़ेगा। - केके गोयल, अध्यक्ष राजनगर एक्सटेंशन बिल्डर्स एसोसिएशन