दिल्ली विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त दयाल सिंह कॉलेज का नाम नहीं बदलेगा। सरकार ने नाम बदलने की अनुमति नहीं दी है और न ही मिलेगी। वहीं, प्रबंधन कमेटी द्वारा नाम बदलने के प्रयास मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बुधवार को यह बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि लोकसभा में भी स्पष्ट कर दिया गया था कि नाम बदलने की कोई योजना नहीं है। दरअसल, दयाल सिंह नाम से दो कॉलेज हैं। अगर प्रबंधन इसे बदलना ही चाहता है तो इसका नाम दयाल सिंह एक और दो रखे। या फिर दयाल सिंह ए और बी। या दयाल सिंह मॉर्निंग या इवनिंग कहे यह उसकी मर्जी है। लेकिन नाम बदलने की कोशिश की गई तो कार्रवाई की जाएगी।
सिखों और शिक्षकों का विरोध
दरअसल, दयाल सिंह सांध्य को सुबह की पाली में चलाने के फैसले के बाद पिछले साल कॉलेज की संचालन समिति (जीबी) ने इसका नाम ‘वंदेमातरम कॉलेज’ रखने का निर्णय लिया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी मंजूरी नहीं दी। मंत्रालय ने भी इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
इसी बीच 25 अप्रैल 2018 को कॉलेज द्वारा वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान टेंट में वंदेमातरम दयाल सिंह कॉलेज का बैनर लगाया गया था। इससे सिखों के बीच काफी रोष देखने को मिला।
वहीं, कॉलेज के कुछ शिक्षक भी इसके विरोध में हैं। शिक्षकों का मानना है कि वंदेमातरम लिखने के लिए इनके पास न तो संचालन समिति (जीबी) की इजाजत है और न ही डीयू की कार्यकारी परिषद (ईसी) और विद्वत परिषद (एसी) से कोई अनुमति। ऐसे में कॉलेज के एक कार्यक्रम में नाम बदलकर लिखना गलत है।