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बाजार में लालच ने तोड़ी नगर निगम की ‘लक्ष्मण रेखा’

Wed, 28 Oct 2015 09:21 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, गुड़गांव
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साइबर सिटी का सबसे व्यस्त सदर बाजार अतिक्रमण के कारण शायद बड़े हादसे के इंतजार में है। अतिक्रमण और अवैध कब्जों ने बाजार की सड़कों व गलियों को इतना संकरा कर दिया है कि यहां से पैदल निकलना तक मुश्किल है।
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कहीं दुकान के आगे रैंप बने हैं तो कहीं रेहड़ी खड़ी हैं। मंगलवार को लोगों की सूझबूझ से आग पर किसी तरह काबू पा लिया गया लेकिन यहां पर कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।

यहां निगमायुक्त रहे प्रवीण कुमार ने कुछ साल पहले दुकानों के आगे सड़क को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए पीली लाइन (लक्ष्मण रेखा) खिंचवाई थी। लेकिन यह ‘लक्ष्मण रेखा’ दुकान के आगे अस्थायी दुकान लगवाने वाले लालची लोगों ने मिटा दी है।
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पार्किंग की जगह पर ऑटो वालों का कब्जा

ऐसे लालची लोग दुकानों के आगे दुकान लगवाने के लिए मोटा पैसा वसूलते हैं। ‘अमर उजाला’ ने बुधवार को सदर बाजार का दौरा कर स्थिति का हाल जाना।

यह त्योहारों का सीजन है। बाजार में खरीदारों की भीड़ बढ़ने लगी है। दीपावली पर भीड़ और बढ़ेगी। सदर बाजार में लगभग 2500 दुकानेें हैं। जहां पर करीब 10 हजार लोग काम करते हैं।

आम दिनों में प्रतिदिन करीब 80 हजार से एक लाख लोग खरीदारी करने के लिए आते हैं। लेकिन त्योहारी सीजन में खरीदारी करने वालों की संख्या करीब डेढ़ लाख तक पहुंच जाती है। अपना वाहन लेकर यहां खरीदारी करने आना बड़ा टेढ़ा काम होगा। बाजार में कहीं भी पार्किंग की जगह नहीं है।

2013 में नगर निगम ने बाजार में निगम की जगह पर करीब 500 वाहनों की पार्किंग की व्यवव्था की थी, लेकिन उस पर पूरी तरह से ऑटो चालकों का कब्जा हो चुका है। यहां खरीदारी करने आने वाले लोगों को अपने वाहन इधर-उधर पार्क करने पड़ते हैं, उसके बाद पैदल बाजार में आना पड़ता है।
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आग की घटना है चेतावनी

सदर बाजार स्थित उत्सव बेकरी में मंगलवार शाम लगी आग की घटना भविष्य के लिए एक चेतावनी की तरह है। यदि इससे भी निगम अधिकारियों ने सबक नहीं लिया तो इससे भी बडे़ हादसे हो सकते हैं।

क्योंकि संकरी सड़कों व गलियों से मौके तक सहायता पहुंचाना ही मुश्किल हो जाएगा। बढ़ते अतिक्रमण को लेकर नगर निगम अधिकारी आंखे मूंदे हुए बैठे हैं।

मात्र कुछ ही कदम की दूरी पर नगर निगम कार्यालय है। सवाल यह है कि क्या निगम अधिकारी भी किसी लालच के कारण यह अतिक्रमण नहीं हटवा रहे हैं।
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