राजनीति में सीनियर और योग्य व्यक्ति को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी या नेतृत्व सौंपने की आवाज लगातार उठती रहती हैं। इनके बजाय किसी दूसरे को दायित्व सौंपने पर अक्सर विवाद पैदा हो जाते हैं।
मगर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इस तथ्य को खारिज करते हुए राजनीतिज्ञों को आइना दिखाया। उन्होंने यहां साफ कहा कि योग्यता से ज्यादा सामंजस्य वालों का महत्वपूर्ण होता है।
कोई भी संगठन और संस्था नेतृत्व के साथ आगे बढ़ता है। संगठन और राजनीतिक में सामान्यतया राजनीतिक योग्यता और परिपक्व व्यक्ति को नेतृत्व सौंपा जाता है।
मगर संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत इससे सहमत नहीं हैं। उन्होंने योग्यता से ज्यादा महत्व कार्यकर्ताओं और सहयोगियों के मध्य सामंजस्य बैठाने वालों को देने की बात कही।
रविवार को संघ के स्वयंसेवक समागम कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने नेतृत्व का महत्व बताने के दौरान इसे इंगित किया था।
उन्होंने कहा कि सबको साथ लेकर चलने वाला ही महत्वपूर्ण है। निर्विवाद रूप से आगे बढ़ने के लिए नेतृत्व सामंजस्य बैठाने वाले के हाथों में सौंपना जरूरी है।
सामंजस्य बैठाने वाले के आसपास विद्वानों और योग्य व्यक्तियों की भीड़ लग जाएगी, जबकि राजनीतिक परिपक्व व्यक्ति सामंजस्य बैठाकर सबको साथ लेकर आगे बढ़ सकेगा, इसमें असमंजस है।
रविवार को दिए गए संघ प्रमुख के इस बयान पर सोमवार को दिनभर मंथन होता रहा। माना जा रहा है कि उन्होंने यह बयान देकर संघ को उपदेश दिया और बीजेपी को संदेश।
उनका यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि दिल्ली में विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी में नेतृत्व परिवर्तन लगातार चर्चाओं में बना रहा।