नाबालिग ने पूछताछ में बताया है कि वह कासगंज में 26 जनवरी, 2018 को तिरंगा यात्रा के दौरान चंदन की मौत से बहुत आहत था। अपने एक दोस्त से उसने एक दिन पहले ही दस हजार रुपये में तमंचा लिया था। वह लंबे समय से अपनी पॉकेट मनी जमा कर रहा था। उसी से उसने तमंचा खरीदा था। वह सोशल मीडिया पर खासा सक्रिय था और इस पर आने वाली खबरों से प्रभावित था। वह यूपी के जेवर से दिल्ली बस में आया था।
किसी ने नहीं बहकाया
नाबालिग ने बताया कि उसे न तो किसी ने बहकाया और न ही किसी ने उसे ऐसा करने को कहा था। नाबालिग खुद को देशभक्त बता रहा है। उसने इस बात से भी इनकार किया है कि वह किसी संगठन से जुड़ा हुआ है। हालांकि नाबालिग मानता है कि प्रदर्शनकारियों के बीच जाते समय उसके अंदर डर था। नाबालिग ने अपने परिवार व दोस्तों को दिल्ली आने के बारे में कुछ नहीं बताया था। उसके पिता का बेकरी का काम है। उसका छोटा भाई आठवीं कक्षा में पढ़ता है।
घायल शादाब को एम्स से मिली छुट्टी
जामिया नगर फायरिंग की घटना में घायल छात्र शादाब फारुक को शुक्रवार सुबह 6 बजे एम्स ट्रॉमा सेंटर से छुट्टी मिल गई। डॉक्टरों ने उसे 15 दिन तक बिस्तर पर आराम करने की सलाह दी है। शादाब के बाएं हाथ में गोली लगी थी।
डॉक्टरों का कहना है कि शादाब का काफी रक्त बह गया था। इससे शारीरिक कमजोरी है। इसी कारण उसे आराम करने की सलाह दी गई है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया का छात्र शादाब बृहस्पतिवार को प्रदर्शन में था, जहां हथियार हाथ में हिलाते हुए एक किशोर नारे लगा रहा था। उसकी चलाई गोली शादाब के हाथ में लगी थी। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने आरोपी किशोर को दबोच लिया।