जामिया नगर के इम्तियाज आलम को रुपयों की सख्त जरूरत थी, उनकी जरूरत पूरी तो हुई मगर 10-10 के 2000 सिक्कों की शक्ल में, जिनका कुल वजन तकरीबन 15 किलो है। आलम जनसंपर्क अधिकारी हैं। वह 500 व 1000 रुपये के पुराने नोट लेकर शुक्रवार को जसोला स्थित जामिया को-ऑपरेटिव बैंक गए थे।
उन्होंने अपनी मजबूरी जताते हुए 20 हजार रुपये की जरूरत बताई। बैंक मैनेजर उनकी जरूरत को समझते हुए रुपये बदलने को तैयार हो गए, मगर शर्त थी कि उन्हें यह पैसे 10-10 रुपये के सिक्कों के रूप में मिलेंगे।
आलम के मुताबिक, पहले उन्होंने सोचा कि इसे लेकर कैसे जाएंगे, लेकिन जरूरत थी इसलिए तैयार हो गए। सोचा कि कम से कम इससे खरीददारी समेत अन्य काम तो होंगे। उन्होंने इन पैसों से देनदारियां खत्म कीं। उन्होंने उन लोगों को खुले देने का ऑफर भी दिया है, जिनके पास दो हजार रुपये के नोट हैं।
इम्तियाज ने कहा जब से पुराने नोट बंद हुए हैं तब से एक बार भी एटीएम ने काम नहीं किया है। बैंक में भी जरूरत के हिसाब से कैश नहीं है। वह करीब चार घंटे लाइन में लगे रहे क्योंकि उन्हें किसी जरूरी काम से गोवा जाना है। ‘मैंने मैनेजर से कहा कि कुछ इंतजाम कीजिए।
उन्होंने कहा कि हमारे पास भी कैश कम ही है। उन्होंने मुझे सिक्के देने का ऑफर दिया। मुझे जरूरत थी तो 15 मिनट बाद मैं राजी हो गया। बस मुझे सिक्के मिल गए। मैंने उन्हें बोरे में भरकर पीठ पर लादा और बैंक से बाहर आ गया।