हरियाणा में नई सरकार के परिवहन आयुक्त अशोक खेमका ने मारुति, होंडा, सुजुकी मोटर साइकिल, हीरो मोटोकॉर्प और होंडा जैसी कंपनियों को सर्विस देने वाली ट्रकों पर शिकंजा कस दिया है।
सरकार ने चार दिसंबर 2014 से ट्रकों और कंटेनरों को फिटनेस सर्टिफिकेट देना बंद कर दिया है। ऑटोमोबाइल कैरियर वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव दमन दिवान ने बताया कि अशोक खेमका का कहना है कि यह सभी कंटेनर ओवरसाइज हैं, जो कमर्शियल मोटर व्हीकल एक्ट के हिसाब से नहीं हैं। दिवान ने बताया कि परिवहन आयुक्त का स्पष्ट आदेश है कि इसकी साइज को कम किया जाए।
ट्रांसपोर्टरों ने कल से सड़क जाम की दी चेतावनी
हरियाणा में सोमवार आधी रात से साठ हजार कॉमर्शियल वाहन (हैवी ट्रक और कंटेनर) सड़कों से उतर गए। रविवार शाम ऑटोमोबाइल कैरियर वेलफेयर एसोसिएशन (एसीडब्ल्यूए) की मुख्यमंत्री मनोहर लाल से बातचीत विफल होने के बाद ट्रांसपोर्टरों ने सोमवार आधी रात से अपने वाहनों को सड़कों से उतार लिया है।
ऑटोमोबाइल कैरियर वेलफेयर एसोसिएशन ने हरियाणा सरकार को चेतावनी दी है कि अगर वाहनों को पहले जैसे ही नहीं चलने दिया गया तो वह जगह-जगह सड़क जाम कर देंगे।
सरकार ने कोई ठोस फैसला नहीं लिया तो जाम लगाया जाएगा। ट्रांसपोर्टरों को एक साथ ऑफ रोड होने से गुड़गांव की तकरीबन 10 हजार से औद्योगिक यूनिटों के समक्ष संकट खड़ा हो गया है।
सरकार को इस दिशा में समझदारी के साथ कोई न कोई ठोस निर्णय लेना होगा। ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के महासचिव दमन दिवान ने बताया कि सरकार उनका पक्ष न तो सुनने को तैयार है और न ही इस पर बात करने को। उन्होंने बताया कि मुलाकात के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री ने भी उनकी एक नहीं सुनी। मजबूरी में वाहनों को ऑफ रोड करने का निर्णय लिया गया है।
चेतावनी का हरियाणा सरकार पर असर नहीं
गुड़गांव में ऑटोमोबाइल कैरियर की सोमवार आधी रात हड़ताल पर जाने की चेतावनी का कोई असर हरियाणा सरकार पर नहीं पड़ा है। हरियाणा परिवहन विभाग के स्पष्ट आदेश है कि ओवरसाइज और ओवरलोड ट्रकों और ट्रालों को प्रदेश की सड़कों पर चलने नहीं दिया जाएगा। इससे पहले रविवार शाम ऑटोमोबाइल कैरियर वेलफेयर एसोसिएशन (एसीडब्ल्यूए) की मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बीच वार्ता विफल हो गई।
परिवहन विभाग के अनुसार मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार ही कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। चेतावनी के बाद से हरियाणा सरकार ने ओवरसाइज चलने वाले ट्रकों की रिपोर्ट परिवहन विभाग से मांग ली है।
मालूम हो कि 18 दिसंबर को परिवहन आयुक्त अशोक खेमका के आदेश के बाद से गुड़गांव और फरीदाबाद में ओवरसाइज ट्रकों पर कार्रवाई शुरू हो गई थी। इसके बाद ऑटोमोबाइल कैरियर वेलफेयर एसोसिएशन ने हड़ताल की धमकी दी है।
आयुक्त अशोक खेमका के आदेश के बाद से ओवरसाइज ट्रकों को क्षेत्रीय यातायात प्राधिकरण के कार्यालयों से फिटनेस प्रमाण पत्र भी नहीं मिल रहा है। इस कारण गुड़गांव में करीब 8 जार वाहन 26 दिनों से कंटेनर पासिंग के लिए खड़े हैं।
यह ट्रासपोर्टर बड़ी-बड़ी कार कंपनियों को अपनी सुविधाएं देती हैं। हड़ताल पर जाने से इन कंपनियों को अपने वाहन को लाने और भेजने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ेगा। विभाग के अनुसार इस समय गुड़गांव में 18 हजार और फरीदाबाद में छह हजार ट्राले रजिस्टर्ड हैं।
एक साथ साठ हजार वाहन हुए ऑफ रोड
एक साथ साठ हजार कॉमर्शियल वाहनों के ऑफ रोड होने से उद्योग जगत काफी परेशान है। उद्यमियों का कहना है कि अगर यह विवाद लंबा खिंचा तो उद्योग जगत की कमर तो टूटेगी ही, साथ ही हजारों लोगों के एक साथ बेरोजगार होने का भी खतरा बढ़ जाएगा।
अगर उद्योगों का माल बाहर नहीं जा पाएगा और कच्चा माल नहीं आ पाएगा तो उद्योगों के पास शटडाउन के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। उल्लेखनीय है कि हरियाणा सरकार ने चार दिसंबर से 35 वर्षों से चल ररहे ट्रकों और कंटेनरों को फिटनेस सर्टिफिकेट देना बंद कर दिया है। ट्रांसपोर्टर इसका विरोध कर रहे हैं।
कॉमर्शियल वाहनों का परिचालन बंद होने से ऑटोमोबाइल सेक्टर के अलावा एक्सपोर्ट कंपनियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष वीपी बजाज का कहना है कि सरकार को ट्रांसपोर्टरों को समय देना चाहिए था।
ऐसा न करके सरकार ने अपरिपक्वता का प्रमाण दिया है। जो वाहन 35 वर्षों से चल रहे थे, उन्हें अचानक डिसक्वालिफाई कर देना उचित नहीं है। इस फैसले से उद्योगों का आउटपुट बुरी तरह से प्रभावित हो जाएगा।
ब माल बाहर नहीं जाएगा तो उद्योगों को अपना प्रोडक्शन बंद करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में मैनपावर भी कम करने का दबाव बढ़ेगा। आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी का कहना है सरकार के इस फैसले से समस्या बढ़ेगी।
कम नहीं होगी। गुड़गांव के उद्योग पहले से ही काफी मंदी में चल रहे हैं। इन परिस्थितियों में और मुश्किल बढ़ जाएगी। उन्होंने बताया कि यहां के एक्सपोर्टरों के गारमेंट विदेश भेजे जाते हैं। जो गुड़गांव के कॉमर्शियल वाहनों के माध्यम से गुजरात और मुंबई तक ले जाए जाते हैं। उनकी आपूर्ति बिल्कुल ठप हो जाएगी। बायर्स को समय पर माल नहीं मिलेगा तो एक्सपोर्टरों को पेनाल्टी देना पड़ेगा। इस स्थिति में गुड़गांव की एक्सपोर्ट इंडस्ट्री टूट जाएगी।
रोजाना दो हजार कारें जाती हैं बाहर
बड़े ट्रकों और कंटेनरों के जरिए गुड़गांव से रोजाना दो हजार कारें देश के कोने-कोने में भेजी जाती हैं। वहीं तकरीबन 10 हजार बाइक की ढुलाई होती है। अगर हरियाणा की बात की जाए तो यहां से रोजाना छह हजार कारें और 30 हजार बाइक की ढुलाई होती है। वहीं हजारों यूनिट ह्वाइट लॉजिस्टिक भी बाहर भेजी जाती हैं।