नई दिल्ली। हिंदी पखवाड़े के तहत इंडिया इस्लामिक सेंटर में अमेज फाउंडेशन की ओर से हिंदी मेरी जान के दूसरे संस्करण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कवि सम्मेलन और मुशायरे के जरिए हिंदी और उर्दू की साझा सांस्कृतिक विरासत की झलक मिली। खास बात यह रही कि उर्दू के मंच पर हिंदी के सम्मान और महत्व की बात हुई।
डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में देशभर से आए करीब 30 कवि और शायर शामिल हुए। इनमें यश मालवीय, आलोक अविरल, रास बिहारी पांडेय, विजय तिवारी, मुस्कान शर्मा, डॉ. माजिद देवबंदी, शकील आजमी और शकील जमाली समेत कई रचनाकारों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं। संयोजक शाहिद अंजुम और संचालक मोइन शादाब रहे।
मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री अशोक यादव ने कहा कि हिंदी और उर्दू सगी बहनों की तरह हैं। कवि सम्मेलन से पहले डॉ. उर्वशी अग्रवाल के गजल संग्रह सिर्फ तुम्हार का विमोचन हुआ। हिंदी-उर्दू के प्रचार में योगदान देने वाले छह लोगों को अमेज पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आयोजक राघवेंद्र द्विवेदी ने कहा कि हिंदी सामग्री की मांग बढ़ रही है। संवाद