हाईकोर्ट ने बीएसएफ जवानों को खराब गुणवत्ता वाला भोजन देने के मामले में गृह मंत्रालय व अर्द्ध सैनिक बलों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने मंत्रालय को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि सोशल मीडिया पर चर्चित हुई बीएसएफ जवान के भोजन को लेकर वीडियो के मामले में क्या कदम उठाए है।
मुख्य न्यायधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा की खंडपीठ ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया कि इस वीडियो के बाद की गई जांच व उठाए गए कदमों संबंधी रिपोर्ट पेश की जाए। खंडपीठ पूर्व सैनिक पूरनचंद आर्य द्वारा इस मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची ने अदालत गृहमंत्रालय व अर्द्ध सैनिक बलों से इस मुद्दे पर जवाब तलब करने की मांग की है।
खंडपीठ ने गृह मंत्रालय के अलावा अर्द्ध सैनिक बल बीएसएफ, सीआईएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, असम राइफल को भी नोटिस जारी कर दायर याचिका पर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 फरवरी तय की है। संक्षित सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने कहा इस वीडियो के सामने आने पर जांच के निर्देश दिए गए हैं और जल्द ही रिपोर्ट आ जाएगी।
उन्होंने कहा गृह मंत्रालय ने पहले इस प्रकार के मामलों को रोकने के लिए उचित कदम उठा लिए है। ऐसे में याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने कहा आप अगली सुनवाई के दौरान विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करे। याची ने 9 जनवरी को सोशल मीडिया पर वायरल हुए बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव का वीडियो का हवाला देते हुए दावा किया है कि बॉर्डर पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों के जवानों को खराब गुणवत्ता का खाना दिया जा रहा है।
याची के वकील अभिषेक कुमार चौधरी ने अदालत से गृहमंत्रालय व अर्द्ध सैनिक बलों को राशन मुहैया कराने व उनके लिए खाना बनाने की क्या तरीका है इस बारे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देने का आग्रह किया। बीएसएफ जवान की ने वीडियो में तेज बहादुर ने अपना खाना दिखाते हुए आरोप लगाया है कि उसे दाल के नाम पर हल्दी में उबला पानी दिया जा रहा है। उन्हें रोटी जली हुई दी जाती है।