नई दिल्ली। कमानी ऑडिटोरियम में बृहस्पतिवार को पंचम निषाद क्रिएटिव्स द्वारा प्रस्तुत संगीतमय संध्या तुका म्हणे कहे कबीर का भव्य समापन हुआ। यह विशेष कार्यक्रम संत तुकाराम और संत कबीर की वाणी के माध्यम से सगुण और निर्गुण भक्ति के दो मार्गों का अद्भुत संगम लेकर आया। रणजनी गायत्री ने संत तुकाराम की अभंगवाणी को सुरों में बांधा। वहीं, भुवनेश कोमकली ने कबीर की निर्गुण वाणी को अपनी सधे स्वर-लहरियों में पिरोया। डॉ. धनश्री लेले ने दोनों संतों के दर्शन और भक्ति के सार को सरल हिंदी में प्रस्तुत कर दर्शकों को गहराई से जोड़ा। संगत में मंदार पुराणिक (तबला), ज्ञानेश्वर सोनवणे (हारमोनियम), कृष्ण सालुंके (पखावज) और अनुरोध जैन (तालवाद्य) ने संगीत को और ऊंचाई दी। सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा। दर्शकों ने इस अनोखे संगीत संवाद को एक आत्मिक अनुभव बताया। कार्यक्रम का समापन शशि व्यास, संस्थापक निदेशक, पंचम निषाद क्रिएटिव्स के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह संध्या भक्ति, दर्शन और संगीत की ऐसी यात्रा बन गई, जो देर तक श्रोताओं के हृदय में गूंजती रही। संवाद