घाट पर की गई व्यवस्था
दिल्ली में सरकार की तरफ से बनवाए गए एक हजार से अधिक घाट पर टेंट, लाइट्स, साफ़-सफ़ाई, सुरक्षा आदि सभी चीजों का इंतजाम किया गया है। साथ ही बहुत से घाटों पर मैथली-भोजपुरी अकादमी ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया है ताकि श्रद्धालु खुशी, सुकून और उल्लास के साथ आस्था के महापर्व छठ को मना सकें।
दिल्ली में यमुना नदी का पानी भी स्वच्छ नहीं : राज कुमारी देवी
छठ महापर्व की रौनक तो गांव में दिखती थी, तालाब के पास जैसे मेला सा लगता होता था। पता भी नहीं चलता था कब पर्व आया और कब चला गया। शहर में गांव जैसी अलौकिक छटा कहां। यहां तो तालाब भी टब में समा गया है। यह कहना है गोल मार्केट में रहने वाली राज कुमारी देवी का।
पिछले 20 साल से दिल्ली में छठ मना रहीं राज कुमारी देवी बताती हैं कि छपरा के शंभू छपरा गांव में तालाब पर जाकर पूरा परिवार धूमधाम से छठ पर्व मनाता था, जबकि दिल्ली में एक टब रखना होता है। इस विकल्प में सभी एक साथ पानी में खड़े होकर अर्घ्य भी नहीं दे सकते। यहां दिल्ली में नदी का पानी भी स्वच्छ नहीं है। दिल्ली में जैसे-तैसे व्यवस्था होती है। धीरे-धीरे अब शहरों में भी व्यवस्था होने लगी है, लेकिन रूप बदल रहा है। यहां चमक-दमक ज्यादा है। ज्यादातर लोग दिखावा करते हैं, जबकि यह पर्व शुद्धता का है। यह प्रकृति से जोड़ता है। दूसरी जगहों पर लोग उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं जबकि इसमें हम डूबते हुए सूर्य को भी अर्घ्य देते हैं। पर्व हमें नई राह दिखाता है।
दिल्ली में भी आने लगी बिहार की मिट्टी की महक
छठ महापर्व की महिमा ही ऐसी है कि सैकड़ों किलोमीटर दूर दिल्ली में भी बिहार की मिट्टी की महक आने लगी है। ऐसा होने में कई साल लगे, लेकिन बहुत कुछ बदल गया। यह कहना है द्वारका-पालम के महावीर एन्क्लेव में छठ मनाने वाली विनीता सिंह का।
उनका कहना है कि 22 साल पहले यहां वह छटा नहीं दिखती थी जो बिहार के आरा के गांव में छठ मनाते हुए देखते थे। समय के साथ सब कुछ बदल गया है। आने वाले दिनों में जो कमियां बची हैं वह भी दूर होंगी। दिल्ली में पूर्वांचल के हजारों लोग रहते हैं। सभी ने मिलकर बिहार को यहां खड़ा कर दिया है। छठ के दौरान हर जगह बिहार की छवि दिखने लगी है। बस अंतर इतना है कि यहां कृत्रिम घाट बनाए जाते हैं, वहां तालाब में पूरा परिवार एक साथ सूर्य को अर्घ्य देता था। यह कमी शायद ही दिल्ली में कभी पूरी होगी। जिस तेजी से दिल्ली में लोग बढ़ रहे हैं, सुविधाएं घट रही हैं। परिवार भी छोटा हो रहा है। हमें उम्मीद है कि बिहार की मिट्टी की महक छठ पर्व के साथ परिवार को भी जोड़ने में मदद करेगी।
सतपुला पार्क में छठ पूजा रोकने के पीछे भाजपा : सौरभ भारद्वाज
चिराग दिल्ली के सतपुला पार्क में छठ पर्व को लेकर आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर भाजपा पर निशाना साधा। पिछले दो दिन से आप के नेता यहां छठ पर्व के लिए घाट बनाने व पूजा करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
सोमवार को पार्टी मुख्यालय में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पिछले 8 साल से सतपुला पार्क में विश्वजीत झा की समिति छठ पूजा का आयोजन करती आ रही है। दिल्ली सरकार ने हर साल की तरह इस बार भी उनको छठ पूजा आयोजन के लिए अनुमति दी गई। दिल्ली के करीब एक हजार छठ घाट में इसका भी नाम है। लेकिन इस बार पूर्वांचल विरोधी भाजपा ने षड्यंत्र के तहत सतपुला पार्क में छठ पूजा के आयोजन को रोकने का षड्यंत्र किया। इसके पीछे भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज का नाम सामने आ रहा है।
छठ पूजा के लिए दिल्ली सरकार की तैयारी अधूरी : सचदेवा
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि छठ पूजा शुरू होने में महज एक दिन बाकी है। लेकिन दिल्ली सरकार की सभी तैयारी अधूरी है। मुख्यमंत्री आतिशी को पूर्वांचल समाज माफ नहीं करेगा।
यमुना किनारे घाटों पर व्रतियों के लिए अभी तक व्यवस्था पूरी नहीं हुई है। 1060 अस्थायी घाटों में 800 से अधिक तैयार नहीं हो पाया है। जब मुख्यमंत्री घाटों का जायजा लेने पहुंची तब तक अधिकांश घाटों तक बिजली कनेक्शन भी नही पहुंचा था। सचदेवा ने कहा कि हास्यास्पद है की मुख्यमंत्री चार नवंबर को कह रही है कि कोई काम अंतिम दिन के लिए नहीं छोडे़ं जबकि 4 दिवसीय छठ पूजा 5 नवंबर दोपहर से शुरू होगी।
स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रित करने के लिए रेलवे ने किए व्यापक इंतजाम
छठ महापर्व पर अपने घर जाने वालों की सुविधा के लिए राजधानी के रेलवे स्टेशनों पर व्यापक इंतजाम किए गए हैं, लेकिन ट्रेनों की लेटलतीफी यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बीते दो से तीन दिन से यात्रियों की भारी भीड़ है। रेलवे की ओर से स्टेशनों पर भीड़ को देखते हुए टेंट लगाकर वेटिंग एरिया, अतिरिक्त टिकट काउंटर, हेल्प डेस्क आदि की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रित करने में अधिकारियों और कर्मचारियों के पसीने छूट रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि बीते एक सप्ताह से अधिक समय से भीड़ नियंत्रित करने और यात्रियों की सुविधा के लिए दिन-रात मेहनत की जा रही है। छठ को लेकर भीड़ मंगलवार तक रहेगी। इसके बाद स्थिति सामान्य होने लगेगी। स्टेशनों पर तमाम इंतजाम के बावजूद स्थित ऐसी है कि अधिकारी दबी जुबान में यह बोल रहे हैं कि मंगलवार का दिन भी किसी तरह सामान्य तरीके से निकल जाए तो समझाे गंगा नहा लिए...।
रेलवे की तरफ से दावा किया जा रहा है कि इस बार त्योहार पर यात्रियों को राहत देने के लिए स्पेशल ट्रेनों की 7435 ट्रिप चलाने का शेड्यूल बनाया गया है। बीते वर्ष दिवाली और छठ पर स्पेशल ट्रेनों की महज 4500 ट्रिप चलाई गईं थी। वर्तमान में यात्रियों की संख्या को देखते हुए ऑन डिमांड अनारक्षित ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं, जिससे उन यात्रियों को राहत मिल सके, जिनके पास आरक्षित टिकट नहीं है, लेकिन यात्रियों की संख्या के आगे इंतजाम काफी नहीं नजर आ रहे हैं।