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किसानों ने तय कर ली है वार्ता के बाद की रणनीति, बातचीत की नाकामी बदल देगी आंदोलन का रुख

Sat, 02 Jan 2021 05:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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आंदोलन के समर्थन में बौद्ध भिक्षु... - फोटो : amar ujala
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कड़ाके की ठंड में बर्फ जैसे ठोस इरादे के साथ दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने साफ कर दिया है कि अगर चार जनवरी को सरकार से होने वाली वार्ता में किसानों की मांगे पूरी नहीं हुई तो आंदोलन तेज करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों ने कहा कि कृषि कानूनों को निरस्त करने और एमएसपी गारंटी के लिए कानून की किसानों की मांग पूरी नहीं हुई तो छह जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे। 

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इसके बाद सात जनवरी से 20 जनवरी के बीच सभी  राज्यों में जागृति अभियान चलाएंगे। किसानों ने यह भी कहा कि इस मामले का समाधान निकलने तक पंजाब और हरियाणा के सभी टोल फ्र्री रहेंगे। उधर, किसानों ने पंजाब सरकार को किसानों ने गन्ने के मूल्य जबकि हरियाणा सरकार को भी चेतावनी दी है कि अगर किसानों की अनदेखी का सिलसिला नहीं थमा तो विरोध तेज होगा।

वार्ता से नहीं निकला रास्ता, तो निकालेंगे ट्रैक्टर मार्च
भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसानों की मांगों पर चार जनवरी को कोई रास्ता नहीं निकला तो छह को ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे। उन्होंने कहा कि 20 जनवरी तक सभी राज्यों में किसानों सहित आम लोगों को कृषि कानूनों और एमएसपी की गारंटी से संबंधित किसानों की मांग के बारे में बताया जाएगा। इसमें सभी वर्ग के लोग शामिल होंगे।
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किसानों के समर्थन के लिए छोड़ना होगा भाजपा का साथ
संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य दर्शनपाल ने कहा कि एनडीए के घटक दलों के नेताओं को कहा कि किसानों के समर्थन में उतरने के लिए उन्हें भाजपा का साथ छोड़ना होगा। उन्होंने कॉरपोरेट़्स पर भी निशाना साधते हुए लोगों से उन कंपनियों के उत्पाद और सेवाओं का बहिष्कार करने की अपील की। 

किसानों के समर्थन में उतरे बौद्ध भिक्षु
संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से नया साल किसानों के साथ मनाने की अपील के तहत सभी वर्ग के लोग शामिल हुए। दिल्ली फॉर फार्मर्स की ओर से सुबह 8 बजे से शाम तक विरोध प्रदर्शन किया। टिकरी बॉर्डर पर पंजाब के बरनाला से किसान अपनी ट्रॉलियों के साथ पहुंचे। गाजीपुर सीमा पर पूर्व-सेवादारों ने किसानों की एकजुटता को प्रदर्शित करते हुए सफाई अभियान चलाया। खास बात यह रही कि नए साल पर किसानों के समर्थन में बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु पहुंचे। 

वार्ता सफल न होने पर आंदोलन का बदलेगा स्वरूप
दर्शन पाल ने कहा कि कुंडली मानेसर पलवल राजमार्ग पर किसानों की प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च को रद्द नहीं किया गया है। अगर चार जनवरी को बातचीत सफल नहीं होती है तो छह को मार्च निकाला जाएगा। इसके बाद शाहजहांपुर सीमा नाकाबंदी को दिल्ली की तरफ लाया जाएगा जबकि सात से 20 जनवरी के दौरान देश जागृति अभियान पखवाड़ा  चलाया जाएगा। 18 जनवरी को महिला किसान दिवस, 23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस जयंती पर किसानों की ओर से विरोध दर्ज किया जाएगा। 

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