कार्रवाई नहीं होने की बेफिक्री कहें या चुनाव जीतने की ललक। वजह चाहे जो रही हो, मगर लोकसभा चुनाव में ‘नेताजी’ चुनाव आयोग से भी नहीं डरे। गाजियाबाद के इतिहास में आदर्श चुनाव आचार संहिता की धज्जियां इस बार सबसे ज्यादा उड़ीं।
पिछले चुनाव के मुकाबले दोगुने 24 केस रजिस्टर्ड हुए। विधानसभा चुनाव से भी नौ मुकदमे ज्यादा दर्ज हुए। इनमें छह प्रत्याशी हैं जिन पर एफआईआर हुई।
वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में आचार संहिता उल्लंघन के 12 केस दर्ज हुए थे। इनमें से पांच तो फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगकर खत्म हो गए। सात में चार्जशीट दाखिल हुई, मगर कोई सजा नहीं हुई। वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में 15 केस दर्ज किए गए, जिनमें से दो में एफआर लग गई।
13 में चार्जशीट दाखिल हुई। ये केस कोर्ट में चल रहे हैं। इस बार 24 केस दर्ज हुए हैं। इनमें बीजेपी, कांग्रेस, बसपा, सपा, आप के प्रत्याशियों के अलावा एक निर्दलीय प्रत्याशी भी रहे, जिन पर एफआईआर हुई।