रेणुका से 266, लखवार से 177 और किशाऊ बांध से 709 क्यूसेक पानी मिलेगा
गुरुग्राम नहर को पाइपलाइन में बदलने की भी तैयारी, मेवात फीडर को भी मिलेगा पानी
मनोज धर द्विवेदी
गुरुग्राम।
तेजी से विकसित हो रहे गुरुग्राम-मानेसर और मेवात (नूंह) में भविष्य की पेयजल जरूरत पूरी करने में किशाऊ बांध परियोजना अहम भूमिका निभा सकती है। हरियाणा के हिस्से में किशाऊ बांध से करीब 709 क्यूसेक पानी आएगा। इसका इस्तेमाल गुरुग्राम वाटर सप्लाई (जीडब्ल्यूएस) और मेवात फीडर पाइपलाइन के जरिये पानी की आपूर्ति के लिए किया जाएगा। किशाऊ बांध परियोजना को लेकर हाल में संबंधित राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद इसके आगे बढ़ने की उम्मीद बढ़ी है। गुरुग्राम में ग्लोबल सिटी और एनसीआर रीजनल प्लान-2041 के तहत ग्रीनफील्ड नमो सिटी विकसित करने की योजना है। मानेसर और पचगांव क्षेत्र में भी तेजी से विकास हो रहा है। इसके अलावा पटौदी और फर्रुखनगर में नए सेक्टर और औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में आने वाले वर्षों में पानी की मांग में बढ़ोतरी होना तय है।
वर्तमान में जीडब्ल्यूएस और एनसीआर चैनल में करीब 400 क्यूसेक पानी का इस्तेमाल हो रहा है। सिंचाई विभाग के आकलन के अनुसार एनसीआर चैनल से आपूर्ति समेत जीडब्ल्यूएस और मेवात फीडर पाइपलाइन के लिए साल 2030 में 988 क्यूसेक, साल 2040 में 1267 क्यूसेक और साल 2050 में 1505 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होगी। इस हिसाब से 2030 तक करीब 588, 2040 तक 867 और 2050 तक 1105 क्यूसेक अतिरिक्त पानी की जरूरत होगी। जीडब्ल्यूएस को पहले 175 क्यूसेक पानी की आपूर्ति के लिए डिजाइन किया गया था। अब इसकी री-मॉडलिंग अथवा पाइपलाइन में तब्दील करने की योजना है, ताकि करीब 686 क्यूसेक पानी की क्षमता के अनुरूप व्यवस्था की जा सके। सिंचाई विभाग भविष्य की जरूरत को देखते हुए परियोजनाओं की योजना वर्ष 2050 की मांग के आधार पर तैयार कर रहा है। दो अक्तूबर को मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में कहा था कि गुरुग्राम में निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मौजूदा गुरुग्राम जलापूर्ति चैनल को खुले नहर मार्ग से भूमिगत पाइपलाइन में परिवर्तित करने की परियोजना का जनवरी में शिलान्यास किया जाएगा। यह परियोजना ककरोई हेड से बसई जल शोधन संयंत्र तक लगभग 69.585 किलोमीटर लंबाई में प्रस्तावित है। परियोजना की अनुमानित लागत 1,993.59 करोड़ रुपये है। इसे पूरा करने की अवधि 30 माह निर्धारित की गई है। परियोजना के तहत गुरुग्राम के क्षेत्रों को निर्बाध जलापूर्ति उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। गुरुग्राम नहर वर्ष 1990 में बनाई गई थी और अब इसकी हालत जर्जर बताई जा रही है।
किशाऊ से हरियाणा को 709 क्यूसेक हिस्सा : हरियाणा सिंचाई विभाग ने जुलाई 2022 में रेणुका, लखवार और किशाऊ जैसे अपस्ट्रीम स्टोरेज बांधों से पानी की उपलब्धता को लेकर विस्तृत अध्ययन किया था। सरकार से मंजूरी के बाद अध्ययन अपर यमुना रिवर बोर्ड को सौंपा गया। अध्ययन के अनुसार इन तीनों परियोजनाओं में हरियाणा का हिस्सा क्रमश: रेणुका बांध से 266 क्यूसेक, लखवार से 177 क्यूसेक और किशाऊ बांध से 709 क्यूसेक है। रेणुका और लखवार परियोजनाओं पर कार्रवाई चल रही है, जबकि किशाऊ परियोजना पर भी आगे काम शुरू होने की उम्मीद है।
गुरुग्राम में भी बढ़ाई जा रही जल उत्पादन क्षमता : भविष्य की जरूरतों को देखते हुए जीएमडीए चंदू-बुढ़ेरा जल संयंत्र में 100 एमएलडी क्षमता के नए संयंत्र पर बनाया जाना है। वहीं, बसई जल संयंत्र में भी 100 एमएलडी क्षमता का नया संयंत्र बनाने की योजना है। दूसरी ओर मेवात में पेयजल आपूर्ति मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। किशाऊ बांध सहित अन्य जल स्रोतों से अतिरिक्त पानी मिलने पर दोनों जिलों में भविष्य की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। वहीं, मेवात में नहरी पानी पहुंचाने के लिए मेवात फीडर पाइपलाइन की योजना है। इससे सोहना के रोजका मेव औद्योगिक क्षेत्र को भी पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। मेवात पानी योजना 1161 करोड़ रुपये की बनी थी।