पांच साल की बच्ची (गुड़िया) से सामूहिक दुष्कर्म के दो आरोपियों को दिल्ली की एक अदालत ने 20 साल कैद की सजा सुनाई है, लेकिन अदालत के इस फैसले पर बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) संस्था ने निराशा व्यक्त की है।
संस्था ने इस मामले में जारी किए अपने बयान में कहा कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेश कुमार मल्होत्रा ने दो दोषियों को सजा देने में शिथिलता दिखाई है।
संस्था ने कहा कि कड़कड़डूमा पोस्को अदालत के विशेष न्यायाधीश ने पांच साल की मासूम बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म मामले में सजा सुनाते समय उदारता दिखाई है, जबकि यह मामला बाल संरक्षण कानून में बदलाव के लिए काफी था, जिसने समाज की अंतरात्मा हिला दी थी।
पांच साल की मासूम के साथ बेरहमी से दुष्कर्म किया गया, उसे मरने के लिए छोड़ दिया गया, जिसकी छह सर्जरी की गईं। ऐसे में दोषियों को अपने जीवन के शेष तक आजीवन कारावास की सजा देनी चाहिए थी। पोस्को अदालत की इस उदारता से मासूम को न्याय नहीं मिला।
संस्था के वकील एचएस फुल्का ने कहा कि वह न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे और दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दिलवाएंगे।