पुलिस अधिकारी जानबूझकर चार्जशीट में खामियां छोड़ते हैं ताकि आरोपियों को छोड़ने के लिए अदालत मजबूर हो जाए। इस तरह आरोपियों के बरी होने से अदालतों की बदनामी हो रही है।
यह टिप्पणी अदालत ने भ्रष्टाचार मामले में आरोपी सरकारी अधिकारी को आरोपमुक्त करते हुए की है। तीस हजारी अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हिमानी मल्होत्रा ने दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग में अधिकारी को भ्रष्टाचार के आरोप से मुक्त करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के अधिकारियों ने चार्जशीट बेहद घटिया तरीके से दाखिल की थी।
अदालत ने अपने फैसले कहा कि जिस तरह से चार्जशीट दाखिल की गई उससे साफ है एसीबी के इंस्पेक्टर राकेश कुमार व एसीपी महेंद्र पाल ने जानबूझकर साक्ष्यों का निरीक्षण नहीं किया।