ट्रायल के करीब तीन वर्ष बाद दिल्ली मेट्रो सोमवार से मेजेंटा लाइन पर बगैर ड्राइवर दौड़ने लगेगी। तकनीक के मामले में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन(डीएमआरसी)ने कोरोना काल को अवसर में तब्दील किया ताकि 2020 में ड्राइवरलेस मेट्रो परियोजना को धरातल पर लाया जा सके। इस लाइन पर मेट्रो परिचालन पर ऑपरेशन एंड कंट्रोल टर(ओसीसी)की हर वक्त नजर रहेगी।
यात्रियों को इससे सुविधा होगी कि परिचालन के दौरान मानवीय भूल ही गुंजाइश नहीं रहेगी जबकि स्वचालित होने की वजह से मेट्रो के स्टॉपेज, अंदर की निगरानी सहित सभी पहलुओं पर कंट्रोल रूम की नजर रहेगी। कोरोना काल में डीएमआरसी के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम इस परियोजना को मूर्त देने सहित मेंट्रीनेंस और यात्रियों को मेट्रो की उच्च स्तरीय सुविधा देने में जुटे रहे।
जनकपुरी पश्चिम-बॉटेनिकल गार्डन के बीच मेंजेंटा लाइन पर बगैर ड्राइवर दौड़ने वाली मेट्रो के परिचालन के दौरान कोई चूक अगर हुई तो तत्काल कंट्रोल रूम से नजदीकी स्टेशन को जानकारी दी जाएगी। इस दौरान किस लाइन पर मेट्रो का परिचालन किया जा सकता है और दूसरी मेट्रो के बीच अंतराल क्या होगा, तमाम बातें कंट्रोल रूम से नियंत्रित होंगी। शास्त्री पार्क और मेट्रो भवन में कंट्रोल सेंटर बनाए गए हैं, जहां मेट्रो के परिचालन के बाद भी स्टेशन और मेट्रो संपत्ति पर नजर 24 घंटे नजर रखी जाएगी।
मेजेंटा लाइन पर जनकपुरी से नोएडा के बाटेनिकल गार्डन तक ड्राइवरलेस मेट्रो सेवाएं शुरू होने से काफी राहत मिलेगी। लाखों यात्री इस कॉरिडोर पर सफर करते हैं, जिनमें अधिकतर आईटी कंपनियों सहित नोएडा की अग्रणी कंपनियों में कार्यरत हैं। बगैर चालक होने की वजह से समय की खास तौर पर पाबंदी रहेगी। अगर, कभी देरी होती है तो आगे रफ्तार में बदलाव भी किया जा सकता है ताकि यात्रियों को देर न हो।
भीड़ होने पर मिलेगी पल पल की जानकारी
दिल्ली मेट्रो में इंतजार का वक्त अगर किसी स्टेशन पर 20 मिनट से अधिक होता है तो सोशल साइट्स के जरिये जानकारी दी जाती है। इस लाइन पर अगर किसी स्टेशन पर देरी होती है तो स्वचालित सेवा होने की वजह से यात्रियों को साथ के साथ जानकारी मिलती रहेगी।
धीरे धीरे वापस लिए जाएंगे ड्राइवर
मेट्रो के संचालन में ड्राइवरों की प्रतिनिशुक्ति की जाएगी, लेकिन बाद में उन्हें धीरे-धीरे वापस ले लिए जाएगा। तीन साल पहले ट्रायल के दौरान हुए हादसे के बाद डीएमआरसी भी फूंक फूंक आगे कदम बढ़ा रही है ताकि यात्रियों की सुरक्षा रहे।
2022 तक एक करोड़ यात्रियों के लिए मेट्रो की सुविधा
पूरे देश में 2014 में पांच शहरों में करीब 248 कि.मी. की मेट्रो लाइन थी,अब यह 702 किमी है। आने वाले दिनों में नेटवर्क विस्तार के बाद माना जा रहा है कि एक हजार किलोमीटर से अधिक नई लाइनें जुड़ेंगी। देश के 27 शहरों में मेट्रो कनेक्टिविटी होगी। 2022 में जब देश अपनी 75 वीं स्वतंत्रता का जश्न मनाएगा, उस वक्त भारत में एक हजार से अधिक किलोमीटर का संयुक्त नेटवर्क होगा। दो साल बाद मेट्रो में औसतन रोजाना एक करोड़ यात्रियों को मेट्रो की सेवाएं उपलब्ध होंगी।
किसी भी परिवहन सेवा के लिए एक कार्ड की होगी जरूरत
नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड(एनसीएमसी) की लांचिंग से यात्रियों को भविष्य में एक से अधिक परिवहन साधनों के इस्तेमाल के लिए महज एक कार्ड की जरूरत होगी। वन नेशन, वन कार्ड के जरिये देश के किसी कोने से भी बैंकों से कार्ड खरीदने के बाद रेलवे, मेट्रो, बस, पार्किंग, रिटेल खरीदारी के अलावा नकदी निकासी की भी सुविधा होगी।
पिंक लाइन पर भी ड्राइवरलेस मेट्रो के दौड़ने के बाद अगले दो वर्ष में सभी लाइनों पर यात्री इस कार्ड का इस्तेमाल कर सकेंगे। फिलहाल कुछ बसों में मेट्रो कार्ड से टिकट खरीदने की सुविधा है, लेकिन बाद में सभी परिवहन साधनों को एक कार्ड के जरिये एकीकृत किया जाएगा।