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Crime Company: दिल्ली में बैठकर अपनी कंपनी चला रहे थे कॉन्ट्रैक्ट किलर, वर्चुअल नंबर से मांगते थे रंगदारी

Fri, 24 Oct 2025 03:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली

सार

बिहार पुलिस का कहना है कि बदमाशों के कब्जे से मिले फोन में एक ऑडियो क्लिप मिली है जिसमें गिरोह सरगना रंजन पाठक चुनाव से पहले आपराधिक घटनाओं से अशांति फैलाने की बात कर रहा है।
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Encounter In Delhi - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रोहिणी इलाके में मुठभेड़ में ढेर बदमाश रंजन पाठक, मनीष पाठक, अमन ठाकुर और बिमलेश महतो दिल्ली में बैठकर सिग्मा एण्ड कंपनी चला रहे थे। इस गिरोह को गैंग नहीं कंपनी बोला जाता था। ये बिहार के सीतामढ़ी जिले के बदमाशों का गिरोह है। 

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ये दिल्ली से बिहार में फोन कर रंगदारी मांगते थे। रंगदारी नहीं देने और इनका बताया हुआ काम नहीं होने पर ये बिहार जाकर हत्या की वारदात को अंजाम देते। इसके बाद ये दिल्ली लौट आते थे। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये बिहार में ज्यादातर व्यवसायी, कारोबारी और नेताओं से रंगदारी मांगते थे। इन्हें धमकी देकर काम करवाते थे। गिरोह का सरगना रंजन पाठक पैसे लेकर सुपारी किलिंग करने के लिए बिहार में प्रसिद्ध था। 

अमन और मनीष मूलरूप से बिहार के रहने वाले थे। अमन नांगलोई और मनीष करावल नगर में रहते थे। इन दोनों ने रंजन पाठक और बिमलेश महतो को दिल्ली में शरण दे रखी थी। दोनों के पास रहकर ये अपना गिरोह चला रहे थे। अपराध शाखा के संयुक्त पुलिस आयुक्त सुरेंद्र सिंह ने बताया कि वचुर्अल नंबर से फोन करने पर लोकेशन दूसरे देशों की आती हैं। यही वजह थी कि पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ रहे थे। इस सिग्मा एण्ड कंपनी ने पिछले तीन महीने में सुपारी लेकर पांच हत्याओं और दो रंगदारी की घटनाओं को अंजाम दिया था। इनके नाम से जिले में दहशत का माहौल था। 
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पुलिस को वीडियो मिली
बिहार पुलिस का कहना है कि बदमाशों के कब्जे से मिले फोन में एक ऑडियो क्लिप मिली है जिसमें गिरोह सरगना रंजन पाठक चुनाव से पहले आपराधिक घटनाओं से अशांति फैलाने की बात कर रहा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ये किसी राजनेता की हत्या की साजिश रच रहे थे। 

वारदात के बाद गैंगस्टरों की तरह लेते थे जिम्मेदारी 
विदेश में बैठे लारेंस बिश्रोई, गोल्डी बरार, रोहित गोदारा, हिमांशु भाऊ आदि गैंगस्टर भारत में कोई वारदात कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर वारदात की जिम्मेदारी लेते थे, उसी तरह रंजन पाठक और गिरोह के सदस्य घटना के बाद पर्चा डालकर घटना की जिम्मेदारी लेते थे। इस तरह जिम्मेदारी लेकर समाज व लोगों को डर का माहौल पैदा कर रहे थे। ये अपनी कंपनी या गिरोह को बड़ा भी करना चाहते थे और लड़कों को गिरोह से जोड़ रहे थे।

पिछले तीन महीने में सामूहिक नरसंहार को दिया था वारदात

  • 18 जुलाई- बाजपट्टी हत्याकांड- इस कांड में रंजन पाठक व उसके गिरोह के सदस्यों ने आदित्य कुमार समेत 6 लोगों की हत्या कर दी थी। 
  • 21 जुलाई- डुमरा थाना कांड(नंबर- 418/25)- रंजन पाठक ने सुपारी लेकर डुमरा थाना खेत्र में मदन कुशवाहा समेत 5 लोगों की हत्या कर दी थी। 
  • 26 सितंबर- डुमरा थाना कांड(नंबर- 462/25)-ब्रह्मर्षि सेना के पूर्व अध्यक्ष गणेश शर्मा समेत तीन लोगों की गिरोह ने सुपारी लेकर हत्या कर दी थी। 
  • 13 अक्तूबर - गाढ़ा थाना कांड(नंबर- 79/25)- पीड़ित से 45 लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी। नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी थी। 
  • 29 सितंबर- चोरौत थाना कांड(नंबर- 123/25)- 1.70 लाख रुपये की सुपारी लेकर सीएसपी दुकान में घुसकर 6 लोगों की हत्या कर दी थी। 
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