क्लाइमेट ट्रेंडस द्वारा उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण की समस्या को लेकर मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य की 99 प्रतिशत से ज्यादा आबादी प्रदूषित हवा में सांस ले रही है। इन सबके मध्य खतरनाक स्थिति यह भी है कि इस स्थिति की वास्तविकता का आकलन करने के लिए राज्य के पास पर्याप्त निगरानी तंत्र भी नहीं है। वायु प्रदूषण सरीखे अदृश्य दानव से निजात पाने के लिए इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसे आम लोगों का मुद्दा बनाकर ही वायु प्रदूषण की गंभीर होती समस्या से छुटकारा पाने का रास्ता निकल सकता है। क्लाइमेट ट्रेंडस ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण की समस्या को लेकर एक वेबीनार भी आयोजित किया था।
इस अध्ययन का लक्ष्य राज्य के वायु गुणवत्ता निगरानी तंत्र की एक तस्वीर पेश करना और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए जरूरी उपाय सुझाना है। इसमें पाया गया कि प्रदेश के वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क में सुधार और तुरंत प्रभाव से निगरानी तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है। इस रिपोर्ट में सिफारिश की गई की जनता के स्वास्थ और उनके हितों की रक्षा के लिए एक निश्चित बिंदु पर वायु गुणवत्ता की गंभीरता के आधार पर प्रदूषण के स्रोतों पता लगा कर उनको कम करने या समाप्त करने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ग्रामीण अंचलों में प्रदूषणकारी तत्वों के संघनन का कोई रिकॉर्ड प्राप्त नहीं हुआ, लेकिन वहां रहने वाले लोग तथा अन्य प्रदूषण के सबसे अधिक प्रभाव में रहते हुए पाए गए। इसकी वजह यह है कि इन इलाकों में बड़े पैमाने पर रोजमर्रा के जीवन को चलाने के लिए कोयला लकड़ी और अन्य कारकों के निर्भरता देखी गई। यही इस वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है, इसलिए इस रिपोर्ट में वायु गुणवत्ता निगरानी तंत्र को शहरों के साथ-साथ गांव में भी स्थापित किए जाने की सिफारिश की गई, ताकि वहां की वायु गुणवत्ता भी सुधर सके। इस रिपोर्ट को लेकर विशेषज्ञो का मत है कि यह रिपोर्ट वस्तुस्थिति को बताने के लिए काफी है। अब समय आ गया है जब इसके लिए आम जनता को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
क्लाइमेट चेंज की आरती खोसला ने कहा कि वायु प्रदूषण के ताजा हालात बेहद चिंताजनक हैं। वायु प्रदूषण को लेकर आमजन उतना संजीदा नहीं है, जितना होना चाहिए। यही वजह है कि यह जानलेवा मुसीबत हमारे दरवाजे तक पहुंच गई है, और अपने होने का संकेत भी लगातार दे रही है। परंतु इसके बावजूद आम जनता और मौजूदा सिस्टम आंख बंद कर कर बैठा है। ऐसे में आवश्यकता है वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों के तंत्र को मजबूत और दक्ष बनाया जाए और वायु प्रदूषण के प्रति उदासीनता को समाप्त किया जाए। मिस इंडिया प्रतियोगिता की उपविजेता मान्या सिंह ने कहा वायु प्रदूषण एक खामोश शिकारी है। इससे पार पाने के लिए सबको कमर कस के साथ होना पड़ेगा सभी लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना चाहिए।