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Delhi NCR News: आमजन बूंद-बूंद को तरसे, अधिकारी हर महीने पी रहे 60 हजार का ठंडा पानी

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जिला सचिवालय में पेयजल संकट, पैकिंग में महीनों से बंद पड़े वाटर कूलर
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दिनेश देशवाल
नूंह। जिले में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच सरकारी कार्यालयों में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। करीब 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद जिला मुख्यालय स्थित लघु सचिवालय, तहसील, कोर्ट परिसर, सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर आमजन को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति लघु सचिवालय की है, जहां आमजन की सुविधा के लिए आए आधा दर्जन नए वाटर कूलर कई महीनों से पैकिंग में बंद पड़े हैं, लेकिन उन्हें अब तक स्थापित नहीं किया गया। लोगों का आरोप है कि जहां अधिकारी और कर्मचारी अपने कमरों में सरकारी खर्च पर हजारों रुपयों का ठंडा पानी पी रहे हैं, वहीं आम लोगों के लिए फ्रीजर और पानी के नल शोपीस बनकर रह गए हैं। दूर-दराज गांवों से अपने काम करवाने आने वाले लोग जब पानी की तलाश में कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं तो उन्हें निराशा हाथ लगती है। मजबूरी में कई लोग बाहर दुकानों से पानी खरीदने को विवश हैं, जिस पर प्रतिदिन 100 से 200 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है।
लघु सचिवालय परिसर में पहले आमजन के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था थी, लेकिन रखरखाव के अभाव और अधिकारियों की लापरवाही के कारण पुराने वाटर कूलर खराब हो गए। इसके बाद नए फ्रीजर तो मंगवा लिए गए, लेकिन उन्हें चालू कराने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। सचिवालय के मुख्य गेट के सामने सीढ़ियों के पास रखे ये नए फ्रीजर महीनों से पैकिंग में बंद पड़े हैं। कर्मचारी बताते हैं कि वरिष्ठ अधिकारी रोजाना इन्हीं फ्रीजरों के सामने से गुजरते हैं, लेकिन किसी ने अब तक उन्हें लगाने की जरूरत नहीं समझी।
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स्थिति यह है कि जिन कार्यालयों में प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपने कार्यों के लिए पहुंचते हैं, वहां पीने के पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। दूसरी ओर सरकारी विभागों में रोजाना 100 से अधिक पानी के कैंपर मंगवाए जाते हैं। यदि औसतन खर्च का हिसाब लगाया जाए तो हर महीने करीब 60 हजार रुपये अधिकारी व कर्मचारियों की पेयजल व्यवस्था पर खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद आमजन को राहत नहीं मिल रही। स्थानीय नागरिक गोपाल पंडित, अनिल कुमार, राजू, नरेन्द्र कुमार, सलीम और रवि ने बताया कि गर्मी के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। शहर से लेकर गांव तक पानी की समस्या बनी हुई है। ऐसे में सरकारी कार्यालयों में भी यदि पीने के पानी की व्यवस्था न हो तो लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन इस ओर गंभीर नजर नहीं आ रहा।
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लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि लघु सचिवालय सहित सभी सरकारी कार्यालयों में तुरंत पेयजल व्यवस्था दुरुस्त की जाए और बंद पड़े वाटर कूलरों को शुरू कर आमजन को राहत दी जाए। वहीं जिला उपायुक्त अखिल पिलानी ने कहा कि जिला सचिवालय में पानी के कैंपर रखवाकर अस्थायी व्यवस्था सोमवार से कर दी जाएगी। साथ ही पैकिंग में बंद पड़े वाटर कूलरों को हर मंजिल पर लगाने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं और सोमवार से इस पर काम शुरू हो जाएगा।
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