दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई और कोर्ट रूम में भाजपा नेता कपिल मिश्रा के भड़काऊ भाषण का वीडियो चलवाया। कोर्ट ने कपिल मिश्रा के भाषण के दौरान पूछा कि कपिल के बगल में एक पुलिस अधिकारी खड़े हैं वह कौन हैं? कोर्ट ने कहा, अब हालात नियंत्रण से बाहर जा रहे हैं। भड़काऊ भाषणों के वीडियो वायरल हैं। सैकड़ों लोगों ने इन्हें देखा। तब भी आप सोचते हैं कि यह एफआईआर दर्ज करना जरूरी नहीं है? पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, मैंने अभी तक वीडियो नहीं देखे हैं।
इस पर कोर्ट ने वहां मौजूद डीसीपी (क्राइम ब्रांच) राजेश देव से पूछा कि क्या आपने वीडियो देखे हैं? इस पर डीसीपी ने जवाब दिया कि उन्होंने अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के दो वीडियो देखे हैं, लेकिन कपिल मिश्रा का वीडियो नहीं देखा। इस पर हाईकोर्ट ने कहा, ऑफिस में कई सारे टीवी हैं। पुलिस अधिकारी कैसे कह सकते हैं कि उन्होंने वीडियो नहीं देखे। हम पुलिस की कार्रवाई से हैरान हैं। इस पर मेहता ने कहा, पुलिस पिकनिक पर नहीं गई है। वे एसिड अटैक झेल रहे हैं।
आधी रात को बैठा कोर्ट, दिल्ली पुलिस की तारीफ
पीठ ने हालांकि, दिल्ली पुलिस की तारीफ भी करते हुए कहा, जब हम आधी रात में फैसला लिख रहे थे, पुलिस सही दिशा में काम कर रही थी और घायलों को बचा रही थी। दरअसल, मंगलवार रात को दिल्ली हाईकोर्ट की विशेष सुनवाई जस्टिस मुरलीधर के आवास पर हुई थी। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को मुस्तफाबाद के एक अस्पताल से एंबुलेंस को सुरक्षित रास्ता और मरीजों को सरकारी अस्पताल में शिफ्ट करने का निर्देश दिया और साथ ही स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए निर्देश
-जिनके रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों की जान गई है, उन्हें प्रशासन भरोसे में ले और पूरे सम्मान के साथ अंत्येष्टि कराए।
-एक हेल्पलाइन और हेल्पडेस्क बनाया जाए। दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि जल्द ही ऐसा होगा।
-एंबुलेंस की पर्याप्त व्यवस्था की जाए और इनके पहुंचने में कोई बाधा न आए।
-अगर पर्याप्त आश्रयगृह नहीं हैं तो इसकी व्यवस्था की जाए।
-इन आश्रयगृहों में कंबल, दवाई, शौचालय और पानी की व्यवस्था मुस्तैद हो।
-डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटीज 24 घंटे की हेल्पलाइन शुरू करें।
-पीड़ितों को मदद करने के लिए पर्याप्त पेशेवरों को तैनात किया जाए।